जया एकादशी 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 28 जनवरी, बुधवार के दिन शाम को 4 बजकर 37 मिनट पर होगा। वहीं, 29 जनवरी, गुरुवार को दोपहर में 1 बजकर 56 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, 29 तारीख को जया एकादशी का व्रत रखना शास्त्र सम्मत होगा।
जया एकादशी व्रत पारण समय
माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी व्रत का पारण 30 जनवरी, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 30 मिनट से पहले करना उत्तम रहेगा।
जया एकादशी पूजा विधि
- एकादशी का व्रत करने वालों को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के बाद साफ वस्त्र धारण करने चाहिए।
- इस दिन केले के पेड़ को जल अर्पित करना चाहिए। साथ ही, वृक्ष की विधि-विधान से पूजा करें।
- अपने घर के मंदिर में एक चौकी पर वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें। इसके पश्चात, चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें।
- भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले फल, वस्त्र, मिष्ठान आदि चढ़ाएं। साथ ही, धूप-दीप से विधि-विधान से पूजा आरती करें।
- विष्णुजी को तुलसी दल के साथ पंचामृत का भोग भी अवश्य लगाना चाहिए। इसके पश्चात, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें और जया एकादशी व्रत का पाठ भी अवश्य करें।
- जया एकादशी पर पूजा के पश्चात फलों, कंबल, अनाज आदि का दान अपने सामर्थ्य अनुसार किया जा सकता है। ऐसा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
जया एकादशी व्रत में क्या करें और क्या न करें?
- मान्यता है कि जया एकादशी का व्रत करने वालों को एक दिन पहले से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए और तामसिक भोजन से दूरी बना लेनी चाहिए।
- एकादशी तिथि पर विष्णु सहस्रनाम और विष्णु शतनाम स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है।
- मान्यता है कि एकादशी के दिन दोपहर के समय सोना वर्जित होता है। ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है। दोपहर के समय विष्णुजी के मंत्रों का जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है।
- एकादशी के दिन व्रती को परिवार वालों को तामसिक भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए। इस दिन केवल सात्विक भोजन करना अच्छा माना जाता है।













