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  • JF-17 लड़ाकू विमान पर हवा-हवाई दावे कर फंसा पाकिस्तान, ना बांग्लादेश, ना इंडोनेशिया, क्यों दूरी बना रहे अंतर्राष्ट्रीय ग्राहक?

    इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अपने JF-17 लड़ाकू विमान को लेकर भारी भरकम दावे किए हैं। लेकिन जिस तरह का प्रचार प्रसार पाकिस्तान कर रहा है, वैसा उसकी इंडस्ट्री के हालात को देखकर लगता नहीं है। पाकिस्तान के पास F-17 फाइटर एयरक्राफ्ट की प्रोडक्शन क्षमता इतनी कम है कि अगर उसे ऑर्डर मिलते भी हैं तो वो


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    By Azad Hind Desk फरवरी 8, 2026
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    इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने अपने JF-17 लड़ाकू विमान को लेकर भारी भरकम दावे किए हैं। लेकिन जिस तरह का प्रचार प्रसार पाकिस्तान कर रहा है, वैसा उसकी इंडस्ट्री के हालात को देखकर लगता नहीं है। पाकिस्तान के पास F-17 फाइटर एयरक्राफ्ट की प्रोडक्शन क्षमता इतनी कम है कि अगर उसे ऑर्डर मिलते भी हैं तो वो अगले कई सालों तक डिलीवरी नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान एक साल में जितने जेएफ-17 बनाता है, उससे वो अपनी घरेलू जरूरत भी शायद पूरा नहीं कर पाएगा। पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC), जो JF-17 बनाता है, उसके पास ऐसा इकोसिस्टम ही नहीं है कि वो भारी मात्रा में विमानों का प्रोडक्शन कर सके। जबकि इस प्रोजेक्ट में चीन का 65 प्रतिशत और पाकिस्तान की सिर्फ 35 प्रतिशत ही हिस्सेदारी है।

    पाकिस्तान ने 2000 के दशक से JF-17 का सीरियल प्रोडक्शन शुरू किया था और उसके बाद से अभी तक वो सिर्फ 175-185 एयरक्राफ्ट बना पाया है। इसमें विदेशी कस्टमर्स को सप्लाई की गई सभी यूनिट्स भी शामिल हैं। यानि पिछले करीब 17 सालों में पाकिस्तान ने 11 विमान प्रति वर्ष के हिसाब से विमान बनाए हैं, जबकि विमान के तमाम क्रिटिकल पार्ट्स चीन के हैं और इंजन रूसी है। हालांकि PAC कामरा ने इस साल प्रोडक्शन क्षमता को 16-18 विमान प्रति वर्ष बनाने की बात जरूर की है, लेकिन ऐसा करना बहुत मुश्किल है। दूसरी तरफ इंटरनेशनल मीडिया के कुछ हिस्से विमान की बढ़ती मांग की कहानियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं और माना जा रहा है कि पाकिस्तान के दावे भी उसी प्रोपेगेंडा का हिस्सा हैं।

    JF-17 लड़ाकू विमान पर पाकिस्तान के दावे हवा हवाई क्यों हैं?
    चीनी एयरोस्पेस एनालिस्ट्स तर्क दे रहे हैं कि अगर पाकिस्तान को ज्यादा ऑर्डर मिलते हैं तो चीनी निवेश बढ़ सकता है। लेकिन चीन की तरफ से पाकिस्तान कोई स्ट्रक्चरल बदलाव किए गये हैं, इसके कोई सबूत अभी तक नहीं हैं। पाकिस्तान ने सऊदी अरब, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, कतर, कजाकिस्तान, सूडान जैसे देशों को JF-17 लड़ाकू विमान बेचने के दावे किए हैं। लेकिन अभी तक एक भी ऐसे सबूत नहीं मिले हैं कि पाकिस्तान में कोई पैरलल असेंबली लाइन बनाई जा रही हों, या सबसिस्टम इंटीग्रेशन क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ किया जा रहा हो या फ्लाइट टेस्ट और सर्टिफिकेशन थ्रूपुट बढ़ाने के लिए कुछ भी किया गया है। यहां तक ना तो चीन की मीडिया ने और ना ही पाकिस्तान की मीडिया ने JF-17 को लेकर किसी भी तरह की कोई बातचीत की कोई रिपोर्ट दी है।

    पाकिस्तान वायुसेना को अपनी जरूरतों के लिए 25 स्क्वार्डर्न विमान होने चाहिए और पाकिस्तान को अभी अपनी वायुसेना से 250 से ज्यादा पुराने विमानों को हटाने हैं। जिनमें मिराज III/V और F-7P/PG फ्लीट हैं, जो अब काफी पुराने हो चुके हैं। ऐसे में अगर पाकिस्तान की घरेलू इंडस्ट्री पूरी क्षमता के साथ लगातार हर साल 18 विमानों का भी प्रोडक्शन करे तो उसे अपनी वायुसेना की जरूरतों को पूरा करने में 14 साल लगेंगे।

    पिछले 10 सालों में पाकिस्तान एयरफोर्स के विमानों की संख्या में काफी कमी भी आई है। पिछले 10 सालों में पाकिस्तान एयरफोर्स ने कम से कम 35 से ज्यादा विमान खो दिए हैं। दुर्घटनाओं में करीब 20-22 विमान नष्ट हुए हैं, जबकि 6 JF-17 लड़ाकू विमान क्रैश किए हैं और भारत के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान वायुसेना ने 12-13 विमान खो दिए थे, जिसकी पुष्टि इस साल जनवरी में हो गई है। भोलाड़ी और नूर खान एयरबेस पर भारत के सटीक हमलों के दौरान पाकिस्तान के कई विमान तबाह हुए थे। पाकिस्तान एयरफोर्स ने क्रैश किए गये विमानों के पीछए रूसी RD-93 इंजन की टेक्निकल दिक्कतों को बताया था। इसके अलावा हकीकत ये है कि पाकिस्तान को अजरबैजान को ही 40 विमानों की डिलीवरी करने में 3 सालों से ज्यादा का वक्त लगेगा। तो फिर वो बाकी देशों को डिलीवरी कैसे दे पाएगा?

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