कपिल देव ने रखी थी जीत की नींव
वेस्टइंडीज से जीत के बाद भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे को हराया लेकिन ऑस्ट्रेलिया से करारी हार झेलनी पड़ी। इसके बाद फिर वेस्टइंडीज से हार गए। अपने चौथे मैच में भारत का सामना जिम्बाब्वे से था। सिर्फ 17 रन पर 5 विकेट गिर गए थे। यहां से कपिल देव ने 175 रनों की पारी खेली। यह वनडे में किसी भी भारतीय बल्लेबाज का पहला शतक था। इसे वनडे इतिहास की सबसे बेहतरीन पारियों में गिना जाता है। इस मैच ने भारतीय टीम के अप्रोच को बदल दिया। उस विश्व कप जीते ने भारतीय क्रिकेट को पूरी तरह बदलकर रख दिया।
67 साल के हुए कपिल देव
आप सोच रहे होंगे हम आपको 1983 विश्व कप के बारे में क्यों बता रहे हैं। इसकी वजह है कि आज कपिल देव का जन्मदिन है। वह 67 साल के हो गए हैं। 6 जनवरी 1959 का कपिल देव निखंज का जन्म चंडीगढ़ में हुआ था। 1978 में उन्होंने भारत के लिए डेब्यू किया। 1994 में उन्होंने अपना आखिरी मैच खेला। उन्हें क्रिकेट इतिहास के सबसे महान ऑलराउंडर में एक माना जाता है। आज भी टेस्ट में 400 विकेट के साथ ही 5000 रन सिर्फ कपिल देव के नाम हैं। वह वनडे में 200 विकेट लेने वाले पहले गेंदबाज थे। संन्यास के समय टेस्ट में सबसे ज्यादा 434 विकेट भी कपिल देव के ही नाम थे।
कपिल देव भारत के पहले ऐसे तेज गेंदबाज थे, जिनकी स्पीड से बल्लेबाज खौफ खाते थे। उनके डेब्यू से पहले भारत अपने स्पिन गेंदबाजों के लिए जाना जाता था। 131 मैच के टेस्ट करियर में उन्होंने 434 विकेट लेने के साथ 5248 रन बनाए। इसमें 8 शतक भी शामिल थे। 225 वनडे मैच में कपिल देव ने 253 विकेट झटके और 3783 रन बनाए।
कपिल देव के अवॉर्ड और सम्मान
रिटायर होने के बाद उन्होंने सितंबर 1999 से सितंबर 2000 के बीच भारतीय टीम के कोच भी रहे। 1982 में कपिल देव को पद्म श्री और 1991 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 2002 में उन्हें विस्डेन द्वारा इंडियन क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी के रूप में चुना गया। 2010 में देव को आईसीसी क्रिकेट हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया। 2013 में बीसीसीआई ने उन्हें सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया।














