डॉ. गौरव गुप्ता, रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, झांसी ओर्थोपेडिक हॉस्पिटल बताते हैं कि मरीज अस्पताल और सर्जन तो चुन लेते हैं लेकिन यह नहीं पूछते कि कौन-सा इम्प्लांट लगाया जाएगा और क्यों। जबकि यह सवाल बहुत जरूरी है।
नी रिप्लेसमेंट कोई साधारण चीज नहीं
घुटने का इम्प्लांट आमतौर पर 20-25 साल तक शरीर में रहता है। यह चलने, संतुलन, सीढ़ियां चढ़ने-उतरने और रोजाना के कामों को सीधे प्रभावित करता है। इसलिए इम्प्लांट का चुनाव सिर्फ कीमत देखकर नहीं बल्कि डिजाइन, फिट और लंबे समय के नतीजों को देखकर होना चाहिए।
इम्प्लांट के हिस्से और सही फिट
नी इम्प्लांट तीन मुख्य हिस्सों से मिलकर बना होता है-फीमरल भाग, टिबियल भाग और बीच का आर्टिकुलर इंसर्ट। हर व्यक्ति के घुटने का आकार और बनावट अलग होती है इसलिए सभी के लिए एक ही तरह का इम्प्लांट सही नहीं होता। जिन इम्प्लांट सिस्टम्स में अलग-अलग साइज और इंटरमीडिएट विकल्प उपलब्ध होते हैं, वे घुटने में बेहतर तरीके से फिट हो पाते हैं। सही फिट होने से हड्डियों और मांसपेशियों पर बेवजह दबाव नहीं पड़ता, दर्द कम होता है और मरीज को चलने-फिरने में ज्यादा आराम और प्राकृतिक महसूस होता है।
बेहतर फिट रहेगा तो मिलेगा बेहतर आराम
डॉ. गौरव गुप्ता कहते हैं कि सही इम्प्लांट चुनना सही साइज के जूते या कपड़े जैसा है। फिट जितना अच्छा होगा, आराम उतना ज्यादा मिलेगा। सही फिट से हड्डियों और मांसपेशियों पर बेवजह का दबाव नहीं पड़ता और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट पाता है।
घुटने की टोपी का भी है महत्व
नी रिप्लेसमेंट के बाद बैठना-उठना, सीढ़ियां चढ़ना और घुटना मोड़ना काफी हद तक घुटने की टोपी (पटेला) के डिजाइन पर निर्भर करता है। अच्छे इम्प्लांट में बेहतर पैटेलो-फेमोरल डिजाइन होता है, जिससे घुटना ज्यादा नेचुरल तरीके से काम करता है।
रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट में बैलेंस भी जरूरी
आज रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट तेजी से बढ़ रहा है लेकिन हर रोबोटिक सिस्टम एक जैसा नहीं होता। कुछ सिस्टम सिर्फ सीटी-स्कैन के आधार पर प्लान बनाते हैं, जबकि एडवांस सिस्टम सर्जरी के दौरान लाइव फीडबैक देते हैं। इससे उसी समय लिगामेंट और सॉफ्ट टिश्यू का संतुलन ठीक किया जा सकता है, जो लंबे समय तक घुटने की मजबूती के लिए जरूरी है।
‘गोल्ड नी इम्प्लांट’ को लेकर सच्चाई
कई लोग ‘गोल्ड नी इम्प्लांट’ सुनकर उसे बेहतर मान लेते हैं। डॉ. गौरव गुप्ता बताते हैं कि ये इम्प्लांट सोने के नहीं बल्कि सिर्फ सोने जैसी कोटिंग वाले होते हैं। अभी तक ऐसा कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि ये सामान्य इम्प्लांट से बेहतर नतीजे देते हों।
झांसी में एडवांस रोबोटिक सुविधा
डॉ. गौरव गुप्ता के नेतृत्व में झांसी ओर्थोपेडिक हॉस्पिटल बुंदेलखंड क्षेत्र में रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां पिछले एक साल में 100 से अधिक रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट सर्जरी सफलतापूर्वक की गई हैं। यहां आयुष्मान भारत और प्रमुख बीमा योजनाओं के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा भी उपलब्ध है।














