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  • LAC के पास IAF के वैकल्पिक रनवे के मायने, डिब्रूगढ़-मोरन NH पर पहली बार उतरेगा PM मोदी का विमान

    नई दिल्ली: 14 फरवरी, 2026 को भारत को वायु सेना के लिए रणनीतिक रूप से एक बहुत ही महत्वपूर्ण वैकल्पिक रनवे मिलने जा रहा है। यह एक इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) है, जिसे असम के डिब्रूगढ़-मोरन नेशनल हाइवे पर बनाया गया है। मतलब, यूं तो आम दिनों में यह एक व्यस्त हाइवे की तरह काम


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    By Azad Hind Desk फरवरी 12, 2026
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    नई दिल्ली: 14 फरवरी, 2026 को भारत को वायु सेना के लिए रणनीतिक रूप से एक बहुत ही महत्वपूर्ण वैकल्पिक रनवे मिलने जा रहा है। यह एक इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) है, जिसे असम के डिब्रूगढ़-मोरन नेशनल हाइवे पर बनाया गया है। मतलब, यूं तो आम दिनों में यह एक व्यस्त हाइवे की तरह काम आएगा, लेकिन आपातकालीन स्थिति में फाइटर जेट से लेकर बड़े-बड़े सैन्य विमानों की इसपर लैंडिंग होगी। भारतीय वायु सेना ने अपनी ट्रायल पूरी कर ली है और शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विमान के उतरने के साथ ही इसका लोकार्पण हो जाएगा।

    असम में इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में डिब्रूगढ़-मोरन नेशनल हाइवे पर बने नए एयर स्ट्रिप पर भारतीय वायु सेना ने एक बड़े एयरशो की भी तैयारी की है। इस दौरान मात्र आधे घंटे में इंडियन एयर फोर्स के फाइटर जेट या तो लैंड करेंगे या फिर फ्लाई-पास्ट करेंगे। उम्मीद है कि इस एयर शो में राफेल, सुखोई जैसे करीब 16 लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। किसी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी पर भारत में इस तरह का एयर शो अपने आप में शायद पहला होगा।

    डिब्रूगढ़-मोरन हाइवे पर रनवे के मायने

    डिफेंस एनालिस्ट डेमियन साइमन ने अपने एक एक्स पोस्ट में मैप के साथ भारतीय वायु सेना के लिए बने इस इमरजेंसी रनवे की अहमियत बताई है। यह रनवे असम में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से मात्र 240 किलो मीटर दूर है। यह एयरस्ट्रिप संकट की स्थिति में बिखरी हुई और बचाव लायक हवाई ताकत में बढ़ोतरी करेगा। इसे भारत-चीन सीमा के पास हाइवे के 3.6 किलो मीटर के मोरन और डेमो खंड में बनाया गया है।

    राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रनवे

    राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से इसे एक रणनीतिक संकेत बताया जा रहा है। इसके माध्यम से एयर फोर्स की तेजी से जवाब देने की क्षमता में बढ़ोतरी होगी, जिसके तहत सैन्य संपत्तियों को ज्यादा जोखिम में डाले बिना दुश्मन से निपटना कहीं आसान होगा। वहीं प्राकृतिक आपदा के समय मानवीय सहायता के लिए भी इसे उपयोगी बताया जा रहा है।

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