लोहड़ी सुन्दर मुंदरिए गीत लिरिक्स (Lohri Sunder Mundriye Song Lyrics)
सुन्दर मुंदरिए
तेरा कौन विचारा
दुल्ला भट्टीवाला
दुल्ले दी धी व्याही
सेर शक्कर पायी
कुड़ी दा लाल पताका
कुड़ी दा सालू पाटा
सालू कौन समेटे
मामे चूरी कुट्टी
जिमींदारां लुट्टी
जमींदार सुधाए
गिन गिन पोले लाए
इक पोला घट गया
ज़मींदार वोहटी ले के नस गया
इक पोला होर आया
ज़मींदार वोहटी ले के दौड़ आया
सिपाही फेर के ले गया
सिपाही नूं मारी इट्ट
भावें रो ते भावें पिट्ट
साहनूं दे लोहड़ी
तेरी जीवे जोड़ी
साहनूं दे दाणे तेरे जीण न्याणे
सुन्दर मुंदरिए गीत मुगल काल के एक पंजाबी लोक नायक दुल्ला भट्टी की कहानी को लेकर है। जो गरीबों के मसीहा थे। उन्होंने सुंदर और मुंदर नामक लड़कियों को दुष्ट ज़मींदारों से बचाया था। इसके बाद उनकी शादी करवाई थी। इसी कहानी को गीत के तौर पर गाया जाता है और उनकी बहादुरी, परोपकार और न्याय को याद किया जाता है।














