मां दुर्गा की 10 महाविद्याएं
दस महाविद्या देवी के 10 रूप हैं और इनका संबंध भगवान विष्णु के दस अवतारों से भी माना जाता है। ऐसे में इनकी उपासना से विशेष फल की प्राप्त होती है। देवी की दस महाविद्याएं मां तारा, मां काली, मां भुवनेश्वरी, मां कमला, मां त्रिपुर सुंदरी, मां बगुलामुखी, मां छिन्नमस्ता, मां धूमावती, मां भैरवी और मां मांतगी है।
गुप्त नवरात्रि में करें इन 10 मंत्रों का जाप
मां तारा का मंत्र और लाभ
‘ओम ह्नीं स्त्रीं हुम फट’ मां तारा के इस मंत्र का जाप 108 बार अवश्य करना चाहिए। शांत मन और श्रद्धापूर्वक इसका जाप करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है और जीवन में हर प्रकार का सुख मिल सकता है। साथ ही, इससे साधक को जीवन के संकटों से भी मुक्ति मिल सकती है।
मां काली का मंत्र और लाभ
‘ओम ह्रीं श्रीं क्रीं परमेश्वरि कालिके स्वाहा’ मंत्र का जाप करने से बहुत उत्तम फल की प्राप्ति होती है। मां काली के इस मंत्र का शांत मन और श्रद्धापूर्वक जाप करने से जीवन की बाधाओं, भय, शत्रु, दुर्घटनाओं से रक्षा होती है। साथ ही, इसके जप से मानसिक शांति महसूस होती है।
मां भुवनेश्वरी का मंत्र और लाभ
‘ह्रीं भुवनेश्वरीयै ह्रीं नमः’ मंत्र मां भुवनेश्वरी को समर्पित है। गुप्त नवरात्रि में इसका जाप करने से सम्मान और प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है। सामाजिक पदों पर सफलता मिल सकती है और देवी की कृपा होने से आत्मबल और निर्णय लेने की क्षमता में भी वृद्धि होती है।
मां कमला का मंत्र और लाभ
‘हसौ: जगत प्रसुत्तयै स्वाहा’ गुप्त नवरात्रि में मां कमला के इस मंत्र का जप अवश्य करना चाहिए। इन्हें धन और ऐश्वर्य की देवी माना जाता है। ऐसे में इस मंत्र का जप करने से घर से दरिद्रता दूर हो सकती है और सुख समृद्धि में वृद्धि होती है। यह मंत्र व्यापार, नौकरी और आर्थिक तरक्की दिलाने वाला है। इसके जप से ऐश्वर्य और सुख-शांति की भी प्राप्ति हो सकती है।
मां त्रिपुर सुंदरी का मंत्र और लाभ
‘ऐ ह्नीं श्रीं त्रिपुर सुंदरीयै नमः’ मंत्र का जाप करने से साधक को सौंदर्य, समृद्धि और ऐश्वर्य की प्राप्ति हो सकती है। लेकिन इसके लिए इस मंत्र का जप ध्यान लगाकर और शांत मन से 108 बार करना चाहिए। मां त्रिपुर सुंदरी के इस मंत्र का जाप करने से दांपत्य जीवन की समस्याओं से भी मुक्ति मिल सकती है।
मां बगुलामुखी का मंत्र और लाभ
‘ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्लीं स्वाहा’ यह मंत्र मां बगुलामुखी को समर्पित है। जिसका जाप करने से मानसिक शांति मिलती है और साहस में वृद्धि होती है। मां को शत्रु नाश की देवी माना गया है। ऐसे में उनका आराधना से साधक शत्रु बाधा से भी मुक्ति मिल सकती है।
मां छिन्नमस्ता का मंत्र और लाभ
‘श्रीं ह्रीं ऐं वज्र वैरोचानियै ह्रीं फट स्वाहा’ मंत्र का जाप कम से कम 108 बार अवश्य करना चाहिए। मां छिन्नमस्ता को बलिदान और उग्रता की देवी माना जाता है। उनके इस मंत्र का जाप करने से भय से मुक्ति मिलती है और सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जाओं और शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है।
मां धूमावती का मंत्र और लाभ
‘धूं धूं धूमावती देव्यै स्वाहा’ इस मंत्र का जाप गुप्त नवरात्रि के दौरान करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। शांत मन से 108 बार इसका जप करने से नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है। साथ ही, जीवन में उन्नति के द्वार खुल सकते हैं।
मां त्रिपुर भैरवी का मंत्र और लाभ
‘ह्रीं त्रिपुर भैरव्यै स्वाहा’ मंत्र तंत्र शक्ति की देवी त्रिपुर भैरवी को समर्पित है। मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में इसका जप करने से तंत्र साधना, ध्यान आदि में प्रगति होती है। साथ ही, इससे शत्रु का नाश होता है और आत्मबल में वृद्धि होती है। देवी के इस मंत्र का जाप 108 बार अवश्य करना चाहिए।
मां मांतगी का मंत्र और लाभ
‘ह्रीं ऐं मातंग्यै नमः’ मंत्र का जाप करने से शिक्षा के क्षेत्र में प्रगति प्राप्त हो सकती है। मां मांतगी को कला विद्या की देवी और तंत्र की सरस्वती भी कहा जाता है। ऐसे में उनके मंत्र का जाप करने से तंत्र ज्ञान और अनूठी विद्याओं में उन्नति मिल सकती है। साथ ही, इससे लेखन और कला के क्षेत्र में भी सफलता मिल सकती है।














