माघ स्नान का महत्व
माघ स्नान का हिंदू धर्म में खास महत्व है। पुराणों में माघ, कार्तिक और वैशाख को बहुत पवित्र माना गया है। मान्यता है कि इन माह के दौरान तीर्थ स्थान पर स्वदेश में रहकर नित्यप्रित स्ननादि करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है। माघ महीने में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर तीर्थराज प्रयागराज में एक माह के कल्पवास से एक कल्प यानी ब्रह्मा के एक दिन का पुण्य प्राप्त होता। साथ ही, माघ मास में संगम में स्नान करना भी बेहद पुण्यकारी माना जाता है।
माघ मास में क्या करना चाहिए
- पुराणों के अनुसार, माघ मास के दौरान तीर्थ स्थान पर स्नान और दान अवश्य करना चाहिए। स्नान करने के लिए सबसे श्रेष्ठ समय सूर्योदय का होता है। मान्यता है कि स्नान में जितना विलंब हो उतना ही न्यून फल प्राप्त होता है।
- माना जाता है कि स्नान करने के लिए काशी और प्रयागराज सबसे उत्तम है। अगर वहां जाना संभव न हो तो जहां भी स्नान करें वहां इन स्थानों का स्मरण करना चाहिए।
- स्नान करते समय ‘पुष्करादीनि तीर्थानि गंगाद्याः सरितस्तथा, आगच्छन्तु पवित्राणि स्नानकाले सदा मम।’ ‘हरिद्वारे कुशावर्ते बिल्वके नीलपर्वते, स्नात्वा कनखले तीर्थे पुनर्जन्म न विद्यते।’, ‘अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवन्तिका, पुरी द्वारावती ज्ञेयाः सप्तैता मोक्षदायिकाः।’, ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति, नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् संनिधिं कुरु।’ का उच्चारण करें।
- माघ मास में वेग से बहने वाली किसी नदी के जल से स्नान किया जा सकता है। इसके अलावा, घर पर नहाने वाले पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। स्नान करने से पहले ‘आपस्त्वमसि देवेश ज्योतिषां पतिरेव च, पापं नाशय मे देव वाङ्मनः कर्मभिः कृतम्।’ से जल की और ‘दुःखदारिद्रयनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणाय च, प्रातः स्नानं करोम्यद्य माघे पापविनाशनम।’ से भगवान का ध्यान करें।
- स्नान कर के पश्चात, ‘सवित्रे प्रसवित्रे च परं धाम जले मम, त्वत्तेजसा परिभ्रष्टं पापं यातु सहस्त्रधा।’ का उच्चारण करते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर हरि का पूजन या और ध्यान करने से बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है।
- माघ मास में भगवान का भजन-कीर्तन कराना शुभ माना जाता है। इस दौरान ब्राह्मणों को भोजन कराएं। साथ ही, माघ मास में कंबल, वस्त्र, चादर, जूते, धोती आदि का दान करना अच्छा माना गया है।
- माघ मास में क्रोध, मदिरा, तामसिक भोजन आदि का त्याग कर देना चाहिए। इस दौरान भक्ति, पूजा-पाठ और विश्वास भाव के साथ स्नान करें तो अश्वमेधादि के समान फल प्राप्त होता है। साथ ही, सभी प्रकार के पापों का नाश हो सकता है।














