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  • Mahashivratri 2026 Date : महाशिवरात्रि कब है? अबकी बार सर्वार्थ सिद्धि योग में बना है शिव पूजा का महासंयोग, जानें पूजन विधि

    महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस त्योहार का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन शिवजी और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। भोलेनाथ ने फाल्गुन मास के चतुर्दशी तिथि को वैराग्य त्याग कर वैवाहिक जीवन को अपना लिया था।


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    By Azad Hind Desk जनवरी 21, 2026
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    महाशिवरात्रि हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस त्योहार का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है। मान्यता है कि इसी दिन शिवजी और देवी पार्वती का विवाह हुआ था। भोलेनाथ ने फाल्गुन मास के चतुर्दशी तिथि को वैराग्य त्याग कर वैवाहिक जीवन को अपना लिया था। ऐसे में महाशिवरात्रि पर शिवजी की पूजा, अभिषेक और व्रत करने से मनुष्य को सुख सौभाग्य की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और दांपत्य जीवन सुखद बना रह सकता है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि इस साल महाशिवरात्रि कब है।

    महाशिवरात्रि 2026 कब है?
    फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ 15 फरवरी, रविवार के दिन शाम को 5 बजकर 5 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 16 फरवरी, सोमवार को शाम के 5 बजकर 35 मिनट चतुर्दशी तिथि व्याप्त होगी। शास्त्रों के अनुसार, जिस रात में निशीथ काल में चतुर्दशी तिथि का संयोग बनता है उसी दिन शिवरात्रि मनाई जाती है। ऐसे में महाशिवरात्रि का व्रत और पूजा करना 15 फरवरी को ही शास्त्र सम्मत रहेगा। वहीं, जो लोग केवल चतुर्दशी का व्रत करते हैं वे 16 फरवरी को भी व्रत रख सकते हैं।

    महाशिवरात्रि पूजा शुभ मुहूर्त
    अबकी बार महाशिवरात्रि पर शिव पूजा का शुभ मुहूर्त शाम में श्रवण नक्षत्र के शुभ संयोग में होगा। मान्यता है कि श्रवण नक्षत्र में शिव पूजन करना अत्यंत उत्तम होता है। पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी रविवार को रात में 7 बजकर 48 मिनट तक उत्तराषाढ़ा नक्षत्र रहेगा, उपरांत श्रवण नक्षत्र शुरू हो जाएगा। इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग में शिव पूजन का महासंयोग बन रहा है। ऐसे में इस दिन शाम को शिवजी और माता पार्वती की पूजा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है।

    महाशिवरात्रि पूजा विधि

    • व्रती को महाशिवरात्रि के दिन सबसे पहले ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि कर लेना चाहिए। इसके बाद, साफ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
    • अपने घर के मंदिर में एक चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ वस्त्र बिछाएं। इसके पश्चात, उस पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
    • अपने चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें। फिर, शिवजी और माता पार्वती को वस्त्र अर्पित करें।
    • महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव का अभिषेक जरूर करना चाहिए। इसके बाद, विधि विधान से शिवजी और मां पार्वती की पूजा अर्चना करें।
    • भोलेनाथ को बेलपत्र, धतूरा, आक के पत्ते आदि जरूर अर्पित करना चाहिए। साथ ही, पूरे शिव परिवार को भी वस्त्र अर्पित करें।
    • सुहागिन महिलाओं को शिवरात्रि के दिन श्रृंगार का सामान माता पार्वती को अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से बेहद शुभ फल की प्राप्ति होती है।
    • महाशिवरात्रि पर सुबह और शाम दो समय शिव परिवार की पूजा करने चाहिए। साथ ही, मन में सुख समृद्धि के कामना करें।
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