नमस्कार प्रियो भानुः जलधारा प्रियो हरः। प्रणिपातप्रियो विष्णुः ब्राह्मणो मधुरप्रियः।।
इस श्लोक से यह सिद्ध हो रहा है कि भगवान शिव को अभिषेक अतिप्रिय है। रुद्राभिषेकं प्रकृर्वन्ति दुःखनाशो भवेद् ध्रुवम् के अनुसार रुद्राभिषेक से निश्चित दुःख का नाश होता है।
महाशिवरात्रि के शुभ मुहूर्त में शिव जी का रुद्राभिषेक करना बेहद कारगर सिद्ध होता है, रुद्राभिषेक विभिन्न कामनाओं के लिए रामबाण उपाय है। महाशिवरात्रि के व्रत का पालन एवं चारों प्रहर में रुद्राभिषेक एवं पूजन करने से कितनी भी पीड़ा ग्रह, नक्षत्रों के माध्यम से क्यों न मिल रही हो, सारे अनिष्ट शांत हो जाते हैं। गंगाजल में काले तिल डालकर शिवलिंग पर अर्पित करने से सारे कष्ट मिटते हैं, रुद्राभिषेक चारों प्रहर करना यदि न सम्भव हो तो स्वयं अपने हाथों से शिव जी पर दूध, दही, गंगाजल आदि अर्पण करें। महामृत्युंजय एवं लघु मृत्युंजय का जाप मृत्युपाश से भक्त की रक्षा करता है।
महाशिवरात्रि की रात्रि महा सिद्धिदायिनी होती है। इस समय में किए गए दान पुण्य, शिवलिंग की पूजा, स्थापना का विशेष फल प्राप्त होता है। वर्ष भर यदि कोई शिव पूजा नहीं कर पाता है, तो केवल महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजन करने से सम्पूर्ण वर्ष के शुभ फल की प्राप्ति सहज ही हो जाती है क्योंकि भोले बाबा बहुत भोले हैं जो भक्तों पर अतिशीघ्र कृपा करते हैं। कालसर्प योग जैसे कष्ट देने वाले योगों की शांति के लिए महाशिवरात्रि के दिन शिव जी सहित सर्प देवता का पूजन तत्काल राहत देने वाला रहता है।













