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  • Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति कब है, अबकी बार बना है ऐसा संयोग पुण्यकाल होगा सूर्योदय के बाद

    मकर संक्रांति के पर्व बेहद ही शुभ और धार्मिक और सांस्कृतिक रुप से बेहद ही खास माना गया है। मकर संक्रांति का पर्व हर साल तब मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन दान पुण्य स्नान और पूजा पाठ का विशेष महत्व है। लेकिन, इस बार मकर संक्रांति की


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    By Azad Hind Desk जनवरी 2, 2026
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    मकर संक्रांति के पर्व बेहद ही शुभ और धार्मिक और सांस्कृतिक रुप से बेहद ही खास माना गया है। मकर संक्रांति का पर्व हर साल तब मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन दान पुण्य स्नान और पूजा पाठ का विशेष महत्व है। लेकिन, इस बार मकर संक्रांति की तारीख को लेकर थोड़ा कंफ्यूजन बना हुआ है। साथ ही इस बार मकर संक्रांति पर एकादशी तिथि का संयोग भी है। ऐसे में आइए जानते हैं मकर संक्रांति इस बार कब मनाई जाएगी।

    कब है मकर संक्रांति 14 या 15 जनवरी 2026 ?

    14 को मकर संक्रांति है लेकिन अबकी बार सूर्य दोपहर के बाद 3 बजकर 6 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं ऐसे में पुण्य काल का समय दिन में 8 बजकर 42 मिनट से शुरू होगा। अबकी बार मकर संक्रांति के दिन षटतिला एकादशी का भी संयोग बना है जिससे अबकी बार सूर्यदेव के साथ भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होगी। साथ ही इस बार मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा।

    क्या मकर संक्रांति पर इस बार कर पाएंगे चावल और खिचड़ी का दान ?

    मकर संक्रांति पर इस बार एकादशी तिथि का संयोग भी है। ऐसे में इस दिन चावल का सेवन न करके आप चाहे तो दान कर सकते हैं। इसके बाद आप 17 जनवरी शनिवार के दिन खिचड़ी बनाकर खा सकते हैं और खिचड़ी का दान पुण्य भी कर सकते हैं।

    मकर संक्रांति पर क्या करें

    1) मकर संक्रांति के दिन इस बार एकादशी और संक्रांति है ऐसे में इस दिन तिल, गुड़, गरम कपड़े और खिचड़ी का दान करें। इस दिन दान पुण्य करने से पापों का नाश होता है।
    2) मकर संक्रांति के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में जाकर स्नान करें। साथ ही इस दिन पितरों के नाम से तर्पण आदि करना चाहिए।

    मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व

    पौराणिक कथाओं में भी मकर संक्रांति का उल्लेख मिलता है। महाभारत काल के अनुसार, भीष्म पितामह जब तीर की शय्या पर लेटे थे तो उन्होंने मकर संक्रांति तक उन्होंने अपने प्राण त्यागने का इंतजार किया था। भीष्म पितामह ने मकर संक्रांति के दिन ही अपने प्राण त्यागे थे। मकर संक्रांति (उत्तरायण) को बहुत ही पुण्यदायी माना गया है।
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