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  • Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति का क्या है महत्व, क्यों मनाते हैं मकर संक्रांति

    Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति हिंदू धर्म सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। नए साल की शुरुआत में ही इस पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। नौ ग्रहों के राजा सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन से


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    By Azad Hind Desk जनवरी 14, 2026
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    Makar Sankranti 2026 : मकर संक्रांति हिंदू धर्म सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। नए साल की शुरुआत में ही इस पर्व को बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। नौ ग्रहों के राजा सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने पर मकर संक्रांति मनाई जाती है। इस दिन से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते हैं। इस दिन को देवताओं का दिन भी कहा जाता है। मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और जप-तप का विशेष महत्व माना गया है।

    मकर संक्रांति को भारत में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। बिहार और उत्तर प्रदेश में इस त्योहार को खिचड़ी के नाम से मनाया जाता है। जबकि पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, असम में भोगाली बिहू और गुजरात में उत्तरायण के रूप में जाना जाता है। इस दिन तिल और गुड़ का दान और सेवन करना बेहद ही शुभ माना जाता है।

    मकर संक्रांति क्यों मनाते हैं ?
    पंचांग के अनुसार, मकर संक्रांति पौष महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को पड़ती है। सूर्य को आत्मा, तेज और जीवन शक्ति का कारक माना जाता है। मकर शनि की राशि है और शनि कर्म, अनुशासन और न्याय के प्रतीक हैं। ऐसे में सूर्य और शनि का यह संयोग बेहद फलदायी माना जाता है। इस दिन किए गए दान, स्नान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।

    मकर संक्रांति का महत्व?
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करना लाभकारी माना जाता है। इससे व्यक्ति के पापों का क्षय होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर जाते हैं। इसलिए यह पर्व पारिवारिक संबंधों में मजबूती भी प्रतीक माना जाता है। वहीं, महाभारत काल में भीष्म पितामह ने उत्तरायण के दिन ही अपना देह त्याग किया था।

    मकर संक्रांति से शुभ कार्यों की शुरुआत
    पौराणिक कथाओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर सूर्य का प्रभाव एक बार फिर बढ़ जाता है। इस दिन सूर्य सात घोड़ों पर सवार होकर चारों दिशाओं में विचरण करते हैं। सूर्य के धनु राशि में प्रवेश के साथ शुरू हुआ खरमास का अशुभ समय भी मकर संक्रांति से समाप्त हो जाता है और गृह प्रवेश, विवाह और मुंडन जैसे सभी प्रकार फिर से शुरू हो जाते हैं।

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