क्या मकर संक्रांति 2026 पर कर सकते हैं चावल और खिचड़ी का दान ?
सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। सूर्य इस दिन अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हें। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिन भी शुरू होता है। श्रीमद्भागवत गीता में भी मकर संक्रांति के दिन का बड़ा महत्व बताया गया है, इस दिन से देवलोक में दिन आरंभ होता और सूर्यदेव अपने दिए हुए वरदान के अनुसार मकर राशि में आकर धन समृद्धि और सुख लाते हैं। इसलिए भी इस दिन का विशेष महत्व है। और परंपराओं से चल मान्यता चली आ रही है कि मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी का भोग लगता है और खिचड़ी एवं चावल का दान भी किया जाता है। लेकिन अबकी बार मकर संक्रांति के साथ षटतिला एकादशी का संयोग होने से दुविधा की स्थिति बन गई है।
शास्त्रों के अनुसार, एकादशी तिथि पर अन्न का सेवन और अन्न दान करना वर्जित माना गया है। खास तौर पर चावल खाने और दान करने की मनाही है। ऐसे में मकर संक्रांति पर इस बार आप तिल, गुड़ और मूंगफली आदि का दान कर सकते हैं। इस दिन आप चावल और खिचड़ी का बाकी सामान दान के निमित्त अलग से निकालकर घर के मंदिर में रख दें।
मकर संक्रांति 14 जनवरी बुधवार के दिन और उससे अगले दिन 15 जनवरी को गुरुवार है। शास्त्रों में गुरुवार के दिन खिचड़ी का सेवन वर्जित बताया गया है। ऐसे में आप उस दिन भी खिचड़ी नहीं बना सकते हैं तो ऐसे में शनिवार का दिन यानी 17 जनवरी को आप खिचड़ी बना सकते हैं और इसी दिन आप चावल का दान भी कर सकते हैं। बता दें कि 17 जनवरी शनिवार के दिन सप्तमी उपरांत अष्टमी तिथि रहेगी जो शनि से संबंधित है और सूर्य जब तक मकर राशि में गोचर करते रहेंगे तब तक माघ मास में दान पुण्य का संयोग बना रहेगा। ऐसे में इस दिन जो भी आप चावल आदि का दान करेंगे उसका आपको उत्तम फल मिलेगा। आप 17 जनवरी को खिचड़ी का सेवन भी करेंगे तो यह शुभ रहेगा और आपके ग्रह दोष कटेंगे।
मकर संक्रांति 2026 पर क्या दान करें ?
मकर संक्रांति पर इस बार आप चाहें तो गुड़, तिल, तिल से बनी चीजें जैसे लड्डू आदि का दान करें। इस दिन तिल का दान करने से पापों का नाश होता है। साथ ही तिल का दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। इस दिन दान पुण्य करने से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।














