मौनी अमावस्या पर पंचग्रहीय योग
मकर राशि में सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र के साथ दिन में 4:39 पर चन्द्रमा का मिलन होने से पंचग्रहीय योग का सृजन हो रहा है, जिसके चलते ब्रह्माण्ड की शुभ उर्जा के माध्यम से भाग्य परिवर्तन का सूक्ष्म द्वार खुलेगा। मकर राशि में पांच ग्रह सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, शुक्र के साथ मिथुन राशि में देवगुरु बृहस्पति, कुम्भ राशि का राहु, सिंह राशि का केतु तथा मीन राशि का शनि, 18 तारीख को पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र सुबह 10:15 तक रहेगा, उसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रारम्भ होगा, अमावस्या देर रात 1:18 मिनट तक रहेगी।
सूर्य और शनि
सूर्य ग्रहों का राजा है, आत्मा और प्रकाश का कारक है, शनि सूर्य का पुत्र है जो अंधकार का प्रतीक है। न्यायकर्ता के रूप में शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या से शायद ही कोई मनुष्य पृथ्वी पर ऐसा हो जिसने इनका नाम न सुना हो, अथवा साढ़ेसाती, ढैय्या से न परिचित हो। पिता-पुत्र होकर सूर्य-शनि एक- दूसरे के शत्रु हैं। शनि के निमित्त छाया दान करना सबसे कारगर, सरल एवं व्ययशून्य उपाय माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य-शनि की शत्रुता का विवरण मिलता है, जब शनि की मकर राशि में पिता सूर्य आते हैं, तो दो विरोधी उर्जाओं के मिलन से होने वाला ब्रह्माण्डीय प्रभाव समस्त चराचर जगत को प्रभावित करता है।
तीर्थराज प्रयागराज का संगम अक्षय क्षेत्र है, विज्ञान की भाषा है, यह एक ऐसा उर्जा क्षेत्र है, जहां पर जल, वायु, वातावरण की दिव्यता मौनी अमावस्या पर देखी जा सकती है। माघ मेले का सबसे बड़ा स्नान पर्व मौनी अमावस्या ही है, करोड़ों श्रद्धालु मौनी अमावस्या पर दान-पुण्य कर्म करते देखे जाते हैं।














