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  • Mauni Amavasya 2026: मौनी अमावस्या कब है? जानें सही तारीख और दान-स्नान का शुभ मुहूर्त

    Mauni Amavasya 2026 : मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्य दायी तिथि माना गया है। माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस पवित्र दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं। ऐसे में स्नान, दान, जप-तप और पितरों का तर्पण करने के लिए इस दिन को शुभ माना


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    By Azad Hind Desk जनवरी 9, 2026
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    Mauni Amavasya 2026 : मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्य दायी तिथि माना गया है। माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस पवित्र दिन सूर्य और चंद्रमा मकर राशि में होते हैं। ऐसे में स्नान, दान, जप-तप और पितरों का तर्पण करने के लिए इस दिन को शुभ माना गया है। मौनी अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व होता है। इससे पुण्य लाभ मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। मान्यता है कि माघ मास के पुण्य काल में हरिद्वार और प्रयागराज में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और यह अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है।

    मौनी अमावस्या 2026 कब है?
    प्रयागराज में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या का स्नान सबसे बड़ा शाही स्नान माना जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि की शुरुआत 17 जनवरी की रात 12 बजकर 4 मिनट पर होगी और अगले दिन 18 जनवरी की रात 1 बजकर 22 मिनट पर इसका समापन होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026, रविवार के दिन मनाई जाएगी।

    मौनी अमावस्या पर दान-स्नान का शुभ मुहूर्त
    मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय तक का समय स्नान के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। ऐसे में सुबह 04 बजकर 43 मिनट से लेकर सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान पवित्र नदी में स्नान करने की परंपरा है। अगर नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्य फल देता है। इस दिन तर्पण और दान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

    मौनी अमावस्या पर पितरों का तर्पण
    मौनी अमावस्या को पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है इस दिन पवित्र जल में स्नान कर तिल मिश्रित जल से पितरों का तर्पण करने और जरूरतमंदों को अन्न और वस्त्र आदि का दान करने से पितृ देवों का विशेष आशीर्वाद मिलता है।

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