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  • Mauni Amavasya 2026 Niyam : मौनी अमावस्या पर गलती से भी न करें ये 4 काम, पितर हो सकते हैं नाराज, जानें क्या करें और क्या न करें

    माघ मास में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है, जो स्नान, दान और पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। मान्यता है कि माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से उत्तम


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    By Azad Hind Desk जनवरी 16, 2026
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    माघ मास में आने वाली अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस तिथि का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है, जो स्नान, दान और पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। मान्यता है कि माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से उत्तम फल की प्राप्ति होती है। इससे पापों का नाश होता है और जातक के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं, शास्त्रों में मौनी अमावस्या के कुछ नियम बताए गए हैं जिनका ध्यान रखना आवश्यक होता है। इस दिन अनजाने में कुछ कार्य करने से पितर नाराज हो सकते हैं। वहीं, कुछ कार्यों को करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। ऐसे में आइए विस्तार से जानें कि मौनी अमावस्या के दिन क्या करें क्या ना करें …

    मौनी अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए?

    • इस बार मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार के दिन पड़ रही है। मान्यता है कि इस पुण्य तिथि पर ब्रह्म मुहूर्त में सूर्योदय से पहले मौन रहकर स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है।
    • अमावस्या तिथि के दिन स्नान करते समय आक के पत्ते को सिर पर रखकर ‘एैरी बैरी पैर तक, बम महादेव माथ पर’ इसे मंत्र के प्रकार बोलते हुए स्नान करना चाहिए।
    • इस दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने का महत्व होता है। ऐसा संभव न होने पर बिना अन्न जल ग्रहण किए किसी जरूरतमंद व्यक्ति को उड़द और चावल का दान करें। इसके अलावा, आप कंबल और गर्म वस्त्र भी दान कर सकते हैं।
    • अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी गई है। ऐसे में दक्षिण दिशा की ओर शाम को सरसों के तेल का दीपक अवश्य जलाएं। साथ ही, इस दिन मुख्य द्वार पर भी दीपक रखना चाहिए।
    • मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर गाय, कुत्ते, कौवे आदि जानवरों के लिए अन्न जल की व्यवस्था करनी चाहिए। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। साथ ही, जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
    • अमावस्या तिथि पर पीपल के वृक्ष पर जल जरूर अर्पित करें। और साथ ही, शाम के समय पीपल के नीचे एक दीपक भी जलाएं। मौनी अमावस्या पर सत्यनारायण की कथा करवाना भी शुभ माना जाता है।
    • इस पुण्यतिथि पर पुण्य काल में प्रयागराज और हरिद्वार में स्नान का बहुत अधिक महत्व है। माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है और अश्वमेध यज्ञ के समान मिलता है।
    • अमावस्या पर पितरों का तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य का कार्य अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से पितरों को शांति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं।

    मौनी अमावस्या के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

    • मौनी अमावस्या के दिन भूलकर भी तामसिक भोजन जैसे- मांस, मछली, लहसुन, प्याज आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे एक दिन पहले से ही ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
    • मौनी अमावस्या के दिन क्रोध, लोभ और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है और इससे पितर रुष्ट हो सकते हैं।
    • इस दिन सफाई का भी विशेष ख्याल रखना आवश्यक होता है। आसपास गंदगी रहने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और पितर नाराज हो सकते हैं। ऐसे में वातावरण सकारात्मक बनाए रखने के लिए साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखें।
    • अमावस्या तिथि पर भूलकर भी कुत्ता, गाय, कौवा आदि जानवरों को परेशान नहीं करना चाहिए। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है और प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।
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