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  • Mother Of All Deals: भारत-EU डील की अहमियत व्यापार से बढ़कर, दोनों पूरी कर सकते हैं एक-दूसरे की ये जरूरत

    लेखक: एन. चंद्रशेखरनयूरोपीय कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस सप्ताह ऐलान किया कि भारत और EU ने अब तक की सबसे बड़ी डील कर ली है। वह बिल्कुल सही हो सकती हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता ही नहीं, अब तक का सबसे विस्तृत और सहयोगात्मक समझौता


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    By Azad Hind Desk जनवरी 31, 2026
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    लेखक: एन. चंद्रशेखरन
    यूरोपीय कमिशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस सप्ताह ऐलान किया कि भारत और EU ने अब तक की सबसे बड़ी डील कर ली है। वह बिल्कुल सही हो सकती हैं। यह अब तक का सबसे बड़ा द्विपक्षीय मुक्त व्यापार समझौता ही नहीं, अब तक का सबसे विस्तृत और सहयोगात्मक समझौता भी है।

    Time महत्वपूर्ण

    इस डील को आकार देने में भले बरसों लगे, लेकिन यह जिस समय पूरा हुआ है, उसका महत्व खास है। यह डील आधुनिक FTA के लिए आदर्श है, जो बताती है कि नियमों और मानकों में बेहतर तालमेल व एक-दूसरे की घरेलू प्राथमिकताओं का सम्मान किए बिना कोई भी व्यापार समझौता सार्थक नहीं हो सकता।

    India में निर्माण

    लागू होने के बाद यह समझौता करीब दो अरब लोगों को कवर करेगा। इसका इकॉनमिक साइज होगा 25 ट्रिलियन डॉलर यानी वैश्विक GDP का 25% और कुल वैश्विक व्यापार का एक तिहाई। इससे मैन्युफैक्चरिंग, सर्विसेज और रिसर्च व इनोवेशन में लाखों रोजगार पैदा होंगे। व्यापारिक बाधाएं कम होने से भारत को विकसित बाजार तक पहुंच मिलेगी। इससे यूरोप के टेक सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा। इस समझौते के होते ही एक बड़ी यूरोपीय कंपनी के प्रमुख ने मुझसे कहा कि वह भारत में निर्माण के लिए तैयार हैं। यही भावना दूसरी कंपनियों की भी है।

    Industry को बढ़ावा

    भारत और यूरोप के बीच द्विपक्षीय व्यापार अभी 136 अरब डॉलर है। 2032 तक यह बढ़कर 250 अरब डॉलर हो सकता है। जब नए बाजार तक पहुंचने की बाधाएं दूर होंगी, तो दोनों के छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय कंपोनेंट्स से टैरिफ कम होगा, तो यहां बने पार्ट्स यूरोपीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों में इस्तेमाल हो सकेंगे। उदाहरण के लिए भारतीय प्लास्टिक, केमिकल्स, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स अब अडवांस्ड मशीनरी, वैकल्पिक ऊर्जा और डिफेंस सप्लाई चेन का हिस्सा बन सकते हैं। इस समझौते में पश्चिमी यूरोप और भारत के बीच दुनिया का सबसे बड़ा इकॉनमिक कॉरिडोर बनाने की क्षमता है। मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि भारत में सैकड़ों नई फैक्ट्रियां स्थापित होंगी।

    FTA से फायदा

    • यूरोपीय कंपनियां भारत में निवेश बढ़ाएंगी

    • ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनेगा भारत

    • इसी बहाने प्रदूषण कम करने पर होगा काम

    Rural इलाकों में फायदा

    समझौते से होने वाला अरबों डॉलर का लाभ देश के उन उद्योगों तक पहुंचेगा, जहां सबसे ज्यादा लोगों को काम मिलता है, खासकर ग्रामीण इलाकों की छोटी फैक्ट्रियों में। इसमें टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, कपड़े, फुटवियर और समुद्री उत्पाद जैसे क्षेत्र शामिल हैं। भारतीय ग्राहकों को बाजार में ज्यादा वैरायटी मिलेगी। कुल मिलाकर, आने वाले बरसों में ये सेक्टर एक से 1.2 करोड़ रोजगार पैदा कर सकते हैं। FTA से लगभग 75 अरब डॉलर के नए भारतीय उत्पादों के लिए रास्ता खुलेगा।

    Specialization का लाभ

    तुरंत मिलने वाले फायदों के अलावा इस ऐतिहासिक समझौते के लंबे वक्त के फायदों को भी देखना चाहिए। दोनों पक्षों में तरक्की की साझा इच्छा है। दोनों ही साइंस, रिसर्च और डिफेंस में नजदीकी सहयोग चाहते हैं। यूरोप के पास चीजें बनाने का बरसों का अनुभव है, लेकिन अब उसे कम लागत और गति चाहिए। दूसरी ओर, भारत की ताकत है बड़े पैमाने पर काम करना, टेक्निकल स्किल, समस्याएं हल करने की क्षमता और कम लागत में तेजी से चीजें बनाने का अनुभव।

    Research को बढ़ावा

    यह FTA बड़े बदलाव लाने वाला है, खासकर वैज्ञानिक रिसर्च और तकनीक में। भारत ‘Horizon Europe’ से जुड़ने पर विचार करेगा, जो दुनिया का सबसे बड़ा रिसर्च प्रोग्राम है। इससे भारतीय रिसर्चर्स को यूरोपीय रिसर्चर्स के साथ बराबरी के स्तर पर काम करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा भारत और यूरोप AI, सेमीकंडक्टर, मटीरियल साइंस, क्लीन टेक्नॉलजी, हेल्थ और सैनिटेशन जैसे क्षेत्रों में भी मिलकर काम करेंगे। दोनों पक्षों के डिजिटल वॉलेट को जोड़ने की कोशिश होगी।

    Resources तक पहुंच

    भारत के पास काबिलियत नहीं, संसाधनों की कमी रही है। जब भी हमें संसाधन मिले, हमने बड़े स्तर पर अच्छा करके दिखाया। कोरोना में हमने अडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में तेज तरक्की की। तय है कि भारत सेमीकंडक्टर, अडवांस्ड बैटरी और जरूरी हार्डवेयर के क्षेत्र में भी क्षमता विकसित कर लेगा।

    Pollution होगा कम

    यह डील डिफेंस में भी दोनों को साथ लाती है। भारत के लोग यूरोप में काम कर सकेंगे, स्टूडेंट्स वहां पढ़ सकेंगे। वहीं, उम्रदराज होती आबादी वाले यूरोप को स्किल्ड युवा मिलेंगे। अपने उत्पादन और उपभोक्ता मानकों को बेहतर करने व कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए हमें इतना बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन कभी नहीं मिला था। भारत ग्लोबल वैल्यू चेन का अहम हिस्सा बन सकता है। देश में कामगार ज्यादा सुरक्षित और स्वस्थ होंगे, प्रदूषण पर लगाम लगेगी।
    (लेखक टाटा संस के चेयरमैन हैं)

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