• Business
  • Oil Prices Down: तेल की कीमतों में 5% की गिरावट, क्या अमेरिका और ईरान के बीच बन गई बात? भारत पर क्या असर

    नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतें 5 फीसदी गिर गई हैं। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत हैं। बाजारों में यह प्रतिक्रिया तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहा है। इन बयानों से एक OPEC सदस्य से जुड़े


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk फरवरी 2, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमतें 5 फीसदी गिर गई हैं। इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत हैं। बाजारों में यह प्रतिक्रिया तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान वाशिंगटन के साथ बातचीत कर रहा है। इन बयानों से एक OPEC सदस्य से जुड़े संघर्ष की चिंताएं कम हो गईं। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब कमोडिटी बाजारों में भी नरमी देखी गई। ब्रेंट क्रूड और यूएस क्रूड दोनों ही भू-राजनीतिक चिंताओं के कारण कई महीनों की ऊंचाई से नीचे आ गए।

    पिछले कुछ दिनों में अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ है। मजबूत डॉलर ने अमेरिका के बाहर के खरीदारों के लिए डॉलर-मूल्य वाले तेल को महंगा बना दिया। OPEC+ ने भी उत्पादन अपरिवर्तित रखने का फैसला किया, जिससे तेल बाजार में पर्याप्त आपूर्ति की चिंताएं बढ़ गईं। तेल की कीमत में 5 फीसदी की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0528 GMT पर 65.94 डॉलर प्रति बैरल पर था। वहीं यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड 61.88 डॉलर प्रति बैरल पर था।
    ‘भारत अब ईरान से नहीं, वेनेजुएला से खरीदेगा तेल’, डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा, कहा- डील पक्की

    अमेरिका ने दिखाया था डर

    पिछले महीने ट्रंप की बार-बार की चेतावनियों के कारण तेल बाजार ने जोखिमों को पहले ही भांप लिया था। ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान परमाणु समझौते को अस्वीकार करता है या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखता है तो अमेरिका कार्रवाई कर सकता है। विश्लेषकों के अनुसार, इन जोखिमों ने पहले तेल की कीमतों का समर्थन किया था।

    क्या तेल की कीमतें गिरती रहेंगी?

    • अगर अमेरिका-ईरान वार्ता आगे बढ़ती है और तनाव कम रहता है तो तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
    • विश्लेषकों का कहना है कि बाजार में अच्छी आपूर्ति है, और मांग मौसमी रूप से कमजोर बनी हुई है। मजबूत अमेरिकी डॉलर कीमतों पर और दबाव डाल सकता है।
    • अगर दोनों देशों के बीच वार्ता टूट जाती है, भू-राजनीतिक जोखिम वापस आ जाते हैं, या आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न होता है तो तेल की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं।
    • OPEC+ की नीति में कोई भी बदलाव या वैश्विक मांग में अप्रत्याशित बदलाव भी कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।

    कमोडिटी की बिकवाली

    तेल की कीमतों में गिरावट तब भी आई जब कमोडिटी बाजारों में भी गिरावट आई। इस सत्र के दौरान सोना और चांदी दोनों में नुकसान देखा गया। विश्लेषकों ने इस चाल का एक हिस्सा मजबूत अमेरिकी डॉलर से जोड़ा। जब डॉलर बढ़ता है, तो डॉलर में मूल्यवान तेल उन खरीदारों के लिए महंगा हो जाता है जो अन्य मुद्राओं का उपयोग करते हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक अमेरिकी डॉलर में फिर से आई मजबूती ने तेल की कीमतों पर दबाव डाला। इस मुद्रा चाल ने गैर-अमेरिकी खरीदारों से मांग कम कर दी और कीमतों में गिरावट का समर्थन किया।

    गिरावट का भारत पर असर

    तेल की कीमत में गिरावट का भारत पर काफी असर पड़ेगा। चूंकि भारत ने रूस का सस्ता तेल खरीदना काफी कम कर दिया है। भारत अब अमेरिका से अपने तेल का आयात बढ़ा रहा है। तेल की कीमत में कमी होने से भारत को कुछ राहत मिलेगी। लेकिन वहीं डॉलर की कीमत बढ़ने से भारत को नुकसान होगा।

    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।