सिराज का तूफान और साउथ अफ्रीका का पतन
मैच की शुरुआत ही किसी एक्शन फिल्म की तरह हुई। साउथ अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, लेकिन भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज ने अपनी आग उगलती गेंदों से इस फैसले को गलत साबित कर दिया। सिराज ने अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ स्पैल डालते हुए पहली पारी में सिर्फ 15 रन देकर 6 विकेट चटकाए। आलम यह था कि मेजबान टीम पहली पारी में महज 55 रनों पर ढेर हो गई। यह भारत के खिलाफ किसी भी टीम का टेस्ट में सबसे कम स्कोर था।
भारत का अजीबोगरीब कोलैप्स
जवाब में भारतीय टीम ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन फिर टेस्ट क्रिकेट का सबसे विचित्र नजारा देखने को मिला। एक समय भारत का स्कोर 4 विकेट पर 153 रन था, लेकिन देखते ही देखते पूरी टीम 153 रनों पर ही सिमट गई। भारत ने बिना एक भी रन जोड़े (0 रन पर) अपने आखिरी 6 विकेट गंवा दिए। यह क्रिकेट इतिहास का पहला ऐसा वाकया था जब किसी टीम ने एक ही स्कोर पर इतने विकेट खोए हों।
मार्करम का शतक और भारत की ऐतिहासिक जीत
दूसरी पारी में साउथ अफ्रीका के लिए एडेन मार्करम ने अकेले संघर्ष करते हुए एक शानदार शतक (106 रन) जड़ा और टीम को 176 के स्कोर तक पहुंचाया। मार्करम के अलावा कोई भी अन्य बल्लेबाज कमाल नहीं कर सका। जिसके कारण भारत को जीत के लिए 79 रनों का मामूली लक्ष्य मिला। दूसरी पारी में यशस्वी जायसवाल और रोहित शर्मा की आक्रामक बल्लेबाजी की मदद से भारत ने 3 विकेट खोकर लक्ष्य हासिल कर लिया और 7 विकेट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की।
टूटा 92 साल पुराना रिकॉर्ड
इस मैच ने 1932 में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच मेलबर्न में खेले गए टेस्ट का रिकॉर्ड तोड़ दिया। वह मैच 656 गेंदों में खत्म हुआ था। वही केप टाउन टेस्ट में कुल 33 विकेट गिरे और पूरे मैच में सिर्फ 642 गेंदें फेंकी गईं। मोहम्मद सिराज को मैच में कुल 7 विकेट लेने के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। इस जीत के साथ भारत ने न केवल सीरीज 1-1 से बराबर की, बल्कि केप टाउन के मैदान पर टेस्ट जीतने वाली पहली एशियाई टीम भी बनी।














