21 साल की उम्र में कप्तानी मिली
मंसूर अली खान पटौदी सिर्फ 21 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम को कप्तान बन गए। वह आज भी टेस्ट में कप्तानी करने वाले सबसे युवा भारतीय हैं। उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे महान कप्तानों में एक माना जाता है। पटौदी ने भारत के लिए 46 टेस्ट मैच खेले। इसमें 40 में कप्तानी की और टीम को 9 में जीत दिलाई। वैसे तो 40 मैच में 9 जीत काफी कम हैं लेकिन भारतीय टीम में आक्रामकता की शुरुआत का श्रेय मंसूर पटौदी को ही जाता है।
एक्सीडेंट की वजह से चली गई थी एक आंख की रोशनी
मंसूर अली खान पटौदी का जन्म 5 जनवरी 1941 को भोपाल के नवाब खानदान में हुआ था। उनके पिता इफ्तिखार अली खान पटौदी भारत के साथ ही इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं। मंसूर जब 11 साल के थे, तभी उनके पिता की मौत हो गई थी। इसके बाद वह इंग्लैंड चले गए। 20 साल की उम्र में वह 1961 में इंग्लैंड में ही वह कार एक्सीडेंट का शिकार हो गए थे। कार के शीशे का एक टुकड़ा उनके दाहिनी आंख में घूस गया था। उनका आंख का ऑपरेशन करना पड़ा लेकिन एक आंख की रोशनी चली गई।
इसके बाद माना जा रहा था कि उनका क्रिकेट करियर खत्म हो जाएगा। लेकिन पटौदी ने हार नहीं मानी। नेट्स पर उतरे और एक आंख से खेलने की प्रैक्टिस शुरू कर दी। एक्सीडेंट के 6 महीने के अंदर ही उन्होंने भारत के लिए टेस्ट डेब्यू कर लिया। नवाब पटौदी के छक्के काफी मशहूर थे। इसके साथ ही उन्हें अपने समय का दुनिया का सबसे बेहतरीन फील्डर भी माना जाता था।
टाइगर पटौदी का करियर कैसा रहा?
1961 से 1975 के बीच नवाब पटौदी ने भारत के लिए 46 टेस्ट मैच खेले। इसमें उन्होंने 34.91 की औसत से 2793 रन बनाए। उन्होंने 6 शतक के अलावा 16 अर्धशतक ठोका। अपने दूसरे ही टेस्ट में उन्होंने फिफ्टी लगाई। तीसरे टेस्ट में 103 रनों की पारी खेलकर भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पहली टेस्ट सीरीज जीताने में मदद की। उनकी कप्तानी में भारत ने घर से बाहर पहली टेस्ट सीरीज 1968 में न्यूजीलैंड को हराकर जीती। वहीं फर्स्ट क्लास क्रिकेट के 310 मैचों में उन्होंने 33 शतक की मदद से 15425 रन बनाए।
मंसूर अली खान पटौदी के पर्सनल लाइफ के भी काफी चर्चे थे। उन्हें उस समय की मशहूर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर से 1968 में शादी की। बॉलीवुड स्टार सैफ अली खान उनके ही बेटे हैं। 2011 में फेफड़ों के इंफेक्शन की वजह से उनका निधन हो गया था। 1964 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड मिला। 1967 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। बीसीसीआई ने 2001 में उन्हें सीके नायडू लाइफटाम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया।













