सहवाग द्रविड़ का हमला
पाकिस्तान द्वारा पहली पारी में घोषित 679 रनों के विशाल स्कोर के जवाब में भारत के सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग और राहुल द्रविड़ ने पाकिस्तानी गेंदबाजों की जमकर खबर ली। दोनों बल्लेबाज भारतीय क्रिकेट के सबसे गौरवशाली रिकॉर्ड्स में से एक—पंकज रॉय और वीनू मंकड की 413 रनों की ओपनिंग पार्टनरशिप—को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच गए थे। यह रिकॉर्ड पिछले 50 सालों से अटूट था, लेकिन चौथे दिन का खेल खत्म होने तक सहवाग और द्रविड़ 403 रनों की अटूट साझेदारी कर चुके थे और विश्व रिकॉर्ड से महज 11 रन दूर थे।
बच गया वर्ल्ड रिकॉर्ड
हालांकि, पांचवें दिन की सुबह नियति और कुदरत ने खेल का रुख ही बदल दिया। लाहौर के घने कोहरे के कारण आखिरी दिन का अधिकांश खेल धुल गया और पूरे दिन में केवल 14 गेंदें ही फेंकी जा सकीं। इसी संक्षिप्त अंतराल में किस्मत ने भारत को दगा दे दिया। टीम का स्कोर जब 410 रन पहुंचा, तभी वीरेंद्र सहवाग 254 रनों की अपनी आक्रामक पारी खेलकर आउट हो गए। भारत विश्व रिकॉर्ड तोड़ने से सिर्फ 4 रन और उसकी बराबरी करने से 3 रन पीछे रह गया। सहवाग ने अपनी इस पारी में 47 चौके और एक छक्का जड़ा था, जबकि दूसरे छोर पर राहुल द्रविड़ 103 रन बनाकर नाबाद रहे।
मैकेंजी और ग्रीम स्मिथ ने तोड़ा
भले ही सहवाग और द्रविड़ उस दिन मंकड और रॉय का 1956 का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाए, लेकिन उनकी 410 रनों की यह साझेदारी टेस्ट क्रिकेट की सबसे यादगार ओपनिंग स्टैंड्स में से एक बन गई। विडंबना यह रही कि जिस 413 रनों के विश्व रिकॉर्ड को भारतीय जोड़ी नहीं छू पाई, उसे दो साल बाद 2008 में दक्षिण अफ्रीका के नील मैकेंजी और ग्रीम स्मिथ ने चटगाँव में बांग्लादेश के खिलाफ 415 रन जोड़कर आखिरकार तोड़ दिया। लाहौर का यह टेस्ट मैच बिना किसी नतीजे के ड्रॉ पर समाप्त हुआ, जहां बल्लेबाजों ने तो राज किया लेकिन गेंदबाजों के लिए इसमें कुछ भी नहीं था।















