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  • ON THIS DAY: टीम इंडिया का शर्मनाक दिन, जिसे किंग कोहली हमेशा रखेंगे याद

    ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर 2011-12 की टेस्ट सीरीज भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक के रूप में याद की जाती है। एडिलेड ओवल में खेले गए सीरीज के चौथे और अंतिम टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 298 रनों के विशाल अंतर से हराकर 4-0 से ‘क्लीन स्वीप’ पूरा किया। यह


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    By Azad Hind Desk जनवरी 28, 2026
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    ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर 2011-12 की टेस्ट सीरीज भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे कठिन दौर में से एक के रूप में याद की जाती है। एडिलेड ओवल में खेले गए सीरीज के चौथे और अंतिम टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 298 रनों के विशाल अंतर से हराकर 4-0 से ‘क्लीन स्वीप’ पूरा किया। यह भारत की विदेशी धरती पर लगातार आठवीं टेस्ट हार थी, जिसने टीम के प्रदर्शन और भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    पोंटिंग और क्लार्क की डबल सेंचुरी

    मैच की शुरुआत से ही ऑस्ट्रेलिया ने अपना दबदबा बनाए रखा। कप्तान माइकल क्लार्क और अनुभवी रिकी पोंटिंग ने भारतीय गेंदबाजों की जमकर खबर ली। इन दोनों दिग्गजों ने दोहरे शतक जड़े; पोंटिंग ने 221 और क्लार्क ने 210 रनों की शानदार पारियां खेलीं। दिलचस्प और चौंकाने वाला आंकड़ा यह रहा कि इन दोनों का सम्मिलित स्कोर भारत के मैच की दोनों पारियों के कुल योग से महज 40 रन कम था। ऑस्ट्रेलिया ने अपनी पहली पारी 7 विकेट पर 604 रनों के पहाड़ जैसे स्कोर पर घोषित की, जो इस सीरीज में उनका दूसरा 600+ का स्कोर था।

    विराट कोहली की सेंचुरी

    जवाब में, भारतीय बल्लेबाजी फिर से ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हालांकि, इस अंधकारमय प्रदर्शन के बीच एक चमकता सितारा विराट कोहली के रूप में उभरा। कोहली ने कठिन परिस्थितियों में अपना पहला टेस्ट शतक (116 रन) बनाया, जो इस पूरी सीरीज में किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा लगाया गया एकमात्र शतक था। भारत की पहली पारी 272 रनों पर सिमट गई। ऑस्ट्रेलिया ने फॉलो-ऑन न देने का फैसला किया और अपनी दूसरी पारी 167/5 पर घोषित कर भारत के सामने 500 रनों का असंभव लक्ष्य रखा।

    टीम इंडिया का क्लीन स्वीप हुआ

    मैच के पांचवें दिन भारत की दूसरी पारी 201 रनों पर समाप्त हो गई। हालांकि यह टेस्ट पांचवें दिन तक खिंचा, लेकिन इसका श्रेय भारतीय प्रतिरोध से ज्यादा माइकल क्लार्क की रणनीति को जाता है। इस जीत के साथ ऑस्ट्रेलिया ने 1999-2000 के बाद भारत के खिलाफ अपनी पहली ‘व्हाइटवॉश’ दर्ज की। एडिलेड की यह हार न केवल एक सीरीज की समाप्ति थी, बल्कि भारतीय क्रिकेट के एक स्वर्ण युग के अवसान का संकेत भी थी जहां महान खिलाड़ियों का संघर्ष साफ नजर आ रहा था।

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