क्या है समिट का विजन?
AI आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहां वह इंसान की क्षमताओं को बहुत बढ़ा सकता है, लेकिन अगर इसे सही दिशा ना दी जाए तो यह समाज के लिए चुनौती भी बन सकता है। इसलिए इस समिट में एआई के इंपैक्ट यानी असर पर फोकस किया है। AI दुनिया भर के डेटा और ज्ञान पर आधारित है, इसलिए उसका फायदा भी सबको मिलना चाहिए, सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। भारत, जो ग्लोबल साउथ का हिस्सा है, उन देशों की आवाज भी सामने ला रहा है जिनकी बात अक्सर कम सुनी जाती है।
विकसित भारत 2047 में कैसे मदद करेगा AI?
भारत को 2047 तक विकसित देश बनाने में AI अहम रोल निभा सकता है। अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो यह बड़ी समस्याओं का समाधान कर सकता है और नए रोजगार भी पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में AI टीबी, डायबिटिक रेटिनोपैथी और मिर्गी जैसी बीमारियों की शुरुआत में ही पहचान करने में मदद कर रहा है। शिक्षा में AI आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों को उनकी भाषा में पढ़ाई में मदद कर रहे हैं। यहां तक कि पुरानी पांडुलिपियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने में भी AI मदद कर रहा है। दुनिया जहां डर रही है कि AI से असमानता बढ़ेगी, वहीं भारत इसका इस्तेमाल अंतर कम करने के लिए कर रहा है।
AI में बायस और सीमाओं को लेकर क्या स्थिति है?
AI में बायस की चिंता आज भी उतनी ही गंभीर है। अगर AI सिर्फ अंग्रेजी या शहरों के डेटा पर आधारित होगा तो गांव और क्षेत्रीय भाषाओं के लोगों के लिए ठीक से काम नहीं करेगा। भारत जैसे विविधता वाले देश में यह बड़ा मुद्दा है। इसलिए अलग-अलग भाषाओं और समाज के अनुसार डेटा तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। संस्थान और टेक कंपनियां इस पर रिसर्च कर रही हैं।
आधार, UPI और AI का मेल क्या सीख देता है?
भारत ने डिजिटल स्ट्रक्चर सार्वजनिक भलाई के लिए बनाया गया है, किसी एक कंपनी के लिए नहीं। यह खुला और सबके लिए उपलब्ध है। शुरुआत से ही इसे बड़े पैमाने पर और सबको ध्यान में रखकर बनाया गया है। अब जब AI को इस ढांचे से जोड़ा जाएगा तो सरकारी योजनाएं और बेहतर और पारदर्शी होंगी। लेकिन साथ ही डेटा सुरक्षा और मजबूत कानून भी जरूरी हैं। हमारा लक्ष्य है कि AI का फायदा गांव के किसान से लेकर छोटे व्यापारियों और महिलाओं तक पहुंचे।
भारत AI युग में अपनी प्रतिभा को कैसे आगे बढ़ाएगा?
भारत के पास प्रतिभा और ऊर्जा है। सिर्फ AI का उपयोग नहीं करना है, बल्कि उसे बनाना भी है। बजट 2026-27 में डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया गया है। IndiaAI फ्रेमवर्क के तहत स्टार्टअप्स और रिसर्च संस्थानों को हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की सुविधा दी जा रही है। सेमीकंडक्टर, AI सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल स्किलिंग पर भी जोर है। हम सिर्फ भाग नहीं ले रहे, बल्कि AI क्रांति को आकार देने की तैयारी कर रहे हैं।
IT सेक्टर पर AI का क्या असर होगा?
AI हमारे IT सेक्टर को बदलेगा ना कि खत्म करेगा। अनुमान है कि 2030 तक IT सेक्टर 400 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। सरकार ने IndiaAI मिशन शुरू किया है। चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, स्मार्ट सिटी) और पांच स्किलिंग सेंटर बनाए गए हैं। हमारा लक्ष्य है कि भारत सिर्फ सेवाएं ही ना दे, बल्कि AI उत्पाद और प्लैटफॉर्म भी बनाए।
AI के दुरुपयोग से सुरक्षा कैसे मिलेगी?
तकनीक इंसान के इरादे पर निर्भर करती है। इसलिए जिम्मेदारी इंसान की है। हमें AI के लिए वैश्विक नियम चाहिए, जैसे हवाई यात्रा के नियम होते हैं। भारत ने जनवरी 2025 में IndiaAI Safety Institute शुरू किया। डीपफेक और फर्जी कंटेंट पर रोक के लिए नियम बनाए गए हैं। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट भी लागू किया गया है। हमारा लक्ष्य है, इनोवेशन और सेफ्टी दोनों साथ चलें।
आत्मनिर्भर भारत में AI की क्या भूमिका होगी?
आत्मनिर्भर भारत का मतलब है तकनीक सिर्फ इस्तेमाल ना करें, बल्कि खुद बनाएं। हमारा लक्ष्य है कि भारत दुनिया के टॉप तीन AI देशों में हो। हम चाहते हैं कि हमारे AI मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल हों, हमारे स्टार्टअप्स वैश्विक स्तर पर बड़े बनें, और हर भारतीय AI को अवसर के रूप में देखे, खतरे के रूप में नहीं। IndiaAI मिशन के जरिए हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि AI हमारी सोच, हमारे मूल्यों और हमारे लोगों के हित में काम करे।













