माघ मास का प्रदोष व्रत कब है ? ( Pradosh Vrat 2026 Date )
पंचांग के मुताबिक, माघ मास की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 जनवरी, गुरुवार को रात में 8 बजकर 18 मिनट से होगा और इसका समापन अगले दिन यानी 16 जनवरी, शुक्रवार के दिन रात में 10 बजकर 22 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि और प्रदोष काल की गणना के अनुसार माघ मास का प्रदोष व्रत 16 जनवरी को रखा जाएगा। वहीं, इसी दिन रात में चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी। इसी के चलते प्रदोष व्रत के दिन ही मासिक शिवरात्रि का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
माघ मास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल का रहेगा। 16 जनवरी, शुक्रवार को प्रदोष काल शाम को 5 बजकर 1 मिनट से लेकर 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस अवधि के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का पूजा करना सबसे उत्तम रहेगा। बता दें कि सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बात तक के समय को प्रदोष काल कहा जाता है।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
- माघ मास में प्रदोष व्रत के दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करना चाहिए। इसके पश्चात, साफ वस्त्र धारण करें।
- अपने घर के मंदिर में एक लकड़ी की चौकी पर वस्त्र बिछाएं और पर भगवान शिव व पार्वती की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। फिर, चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें।
- साथ ही, घर के मंदिर या शिवालय में जाकर व्रती को बेलपत्र, गंगाजल, दही, शहद, दूध आदि से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।
- शिवजी को चंदन, फूल, नैवेद्य, धूप-दीप, अक्षत आदि अर्पित करें। इसके बाद, विधि-विधान से पूजा आरती करें।
- शाम को प्रदोष काल में स्वच्छ होकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें और फिर, ‘ओम नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- शिवजी और मां पार्वती की आरती करने के बाद भगवान को भोग लगाएं।














