• Religion
  • Pradosh Vrat 2026 Date : माघ मास का प्रदोष व्रत कब है, जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है। हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है। वहीं, माघ मास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को माघ मास प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से अत्यंत शुभ फल की


    Azad Hind Desk अवतार
    By Azad Hind Desk जनवरी 15, 2026
    Views
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement
    प्रदोष व्रत का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व है। हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है। वहीं, माघ मास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत को माघ मास प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है। वहीं, इस बार प्रदोष व्रत के दिन ऐसा शुभ संयोग बन रहा है कि यह तिथि बेहद खास रहने वाली है। ऐसी मान्यता है कि इस अवधि के दौरान शिवजी बहुत उदार होते हैं और अपने भक्तों पर विशेष कृपा बनाए रखते हैं। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं कि माघ मास प्रदोष व्रत कब है, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।

    माघ मास का प्रदोष व्रत कब है ? ( Pradosh Vrat 2026 Date )
    पंचांग के मुताबिक, माघ मास की त्रयोदशी तिथि का आरंभ 15 जनवरी, गुरुवार को रात में 8 बजकर 18 मिनट से होगा और इसका समापन अगले दिन यानी 16 जनवरी, शुक्रवार के दिन रात में 10 बजकर 22 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि और प्रदोष काल की गणना के अनुसार माघ मास का प्रदोष व्रत 16 जनवरी को रखा जाएगा। वहीं, इसी दिन रात में चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी। इसी के चलते प्रदोष व्रत के दिन ही मासिक शिवरात्रि का संयोग भी बन रहा है। ऐसे में प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

    प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त
    माघ मास में पड़ने वाले प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त प्रदोष काल का रहेगा। 16 जनवरी, शुक्रवार को प्रदोष काल शाम को 5 बजकर 1 मिनट से लेकर 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस अवधि के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का पूजा करना सबसे उत्तम रहेगा। बता दें कि सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बात तक के समय को प्रदोष काल कहा जाता है।

    प्रदोष व्रत पूजा विधि

    • माघ मास में प्रदोष व्रत के दिन व्रती को सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करना चाहिए। इसके पश्चात, साफ वस्त्र धारण करें।
    • अपने घर के मंदिर में एक लकड़ी की चौकी पर वस्त्र बिछाएं और पर भगवान शिव व पार्वती की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। फिर, चारों ओर गंगाजल का छिड़काव करें।
    • साथ ही, घर के मंदिर या शिवालय में जाकर व्रती को बेलपत्र, गंगाजल, दही, शहद, दूध आदि से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।
    • शिवजी को चंदन, फूल, नैवेद्य, धूप-दीप, अक्षत आदि अर्पित करें। इसके बाद, विधि-विधान से पूजा आरती करें।
    • शाम को प्रदोष काल में स्वच्छ होकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें और फिर, ‘ओम नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
    • शिवजी और मां पार्वती की आरती करने के बाद भगवान को भोग लगाएं।
    728 x 90 Advertisement
    728 x 90 Advertisement
    300 x 250 Advertisement

    हर महीने  ₹199 का सहयोग देकर आज़ाद हिन्द न्यूज़ को जीवंत रखें। जब हम आज़ाद हैं, तो हमारी आवाज़ भी मुक्त और बुलंद रहती है। साथी बनें और हमें आगे बढ़ने की ऊर्जा दें। सदस्यता के लिए “Support Us” बटन पर क्लिक करें।

    Support us

    ये आर्टिकल आपको कैसा लगा ? क्या आप अपनी कोई प्रतिक्रिया देना चाहेंगे ? आपका सुझाव और प्रतिक्रिया हमारे लिए महत्वपूर्ण है।