क्या है इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF)
इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी असम के मोरान में है। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसिलिटी 4.2 किलोमीटर की एक पट्टी है, जो चीन सीमा से करीब 300 किलोमीटर ही दूर है। यहां से म्यांमार सीमा भी करीब 200 किलोमीटर ही है। पीएम मोदी ने चाबुआ एयरफील्ड से उड़ान भरी थी, जो नेशनल हाइवे-37 पर बनी एक पट्टी है। 1962 में चीन से युद्ध के दौरान असम में अच्छी रोड नहीं होने के नाते भारत की खामियां उजागर हो गई थीं।
भारत कैसे हाइवे को रनवे में बदल रहा है
असम सेंटिनल नाम की एक वेबसाइट के अनुसार, हाइवे को रनवे बनाने का काम नेशनल हाइवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) ने किया है। NHIDCL ने भारतीय वायुसेना के सहयोग से डिब्रूगढ़ जिले में NH-127 पर 4.2 किमी की पट्टी को फाइटर जेट्स और चिमानों के लिए एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (ALG) में बदला है।
चाबुआ एयरफोर्स स्टेशन के बेहद करीब है ELF
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी असम के डिब्रूगए़-मोरान नेशनल हाइवे का हिस्सा है। यह भारत की पूर्वोत्तर में पहली ऐसी फैसिलिटी है। यह चाबुआ एयरफोर्स स्टेशन के बेहद करीब है।
किस तरह के विमान टेकऑफ या लैंड कर सकेंगे
फर्स्ट पोस्ट के अनुसार, यह ELF सिविल और मिलिट्री दोनों तरह के विमानों की लैंडिंग या टेकऑफ के लिए है। इसे बनाने में करीब 100 करोड़ की लागत आई है। इस पर राफेल फाइटर जेट्स और C-17 ग्लोबमास्टर विमानवाहक एयरक्रॉफ्ट भी लैंड या टेकऑफ कर सकेंगे।
तेजस, राफेल जैसे फाइटर जेट्स भर सकते है उड़ान
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के अनुसार, ELF पर 40 टन की क्षमता वाले फाइटर जेट्स उतर सकते हैं। साथ ही 74 टन तक के ट्रांसपोर्ट एयरक्रॉफ्ट भी उतर सकेंगे। यहां पर 40 मिनट के एयर शो में तेजस, सुखोई और राफेल जैसे लड़ाकू विमानों ने करतब दिखाए।
कितनी महत्वपूर्ण है यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी
यह इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी चीन सीमा यानी LAC के पास है। इस फैसिलिटी को सी-17 ग्लोबमास्टर और सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस जैसे भारी विमान भी उतर सकेंगे।
यहां से ये विमान तेजी से सैनिकों और साजोसामान को सीमा तक पहुंचा सकेंगे। आपात स्थिति या युद्ध के दौरान फौजों और फाइटर जेट्स की सीमा पर तैनाती की जा सकेगी। चीन के भी सीमा के पास कई एयर बेस हैं, ऐसे में यह फैसिलिटी बेहद अहम है।
देश में इन जगहों पर भी है इमरजेंसी लैंडिंग की सुविधा
नवभारत टाइम्स की एक खबर के अनुसार, असम को मिलाकर अब देश में 6 जगहों पर इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी बन चुकी है। इससे पहले राजस्थान के बाड़मेर (NH-925A), उत्तर प्रदेश के आगर-लखनऊ एक्सप्रेसवे और उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस के साथ ओडिशा के बालासोर (NH-16) और आंध्र प्रदेश के नेल्लोर (NH-16) में ऐसी ELF हैं। भारतीय वायुसेना और NHAI ने मिलकर देश की 28 जगहों पर यह सुविधा विकसित करने की योजना बनाई है।
आपदा की स्थिति में भी काम आ सकेगा
आपदा की स्थिति में भी यह ELF तेजी से बचाव मिशनों के लिए काम आ सकेगा। यहां से तेजी से राहत सामग्री ले जाई जा सकेगी। बचाव अभियानों में तेजी लाई जा सकेगी। हेलिकॉप्टर आधारित बचाव मिशनों को अंजाम दिया जा सकेगा।













