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  • Rahu Effects On BJP Kundali : राहु के प्रभाव से ग्रस्त हो रही बीजेपी की कुंडली, और यह दो अशुभ शकुन दे रहे कठिन दिनों का संकेत

    ज्योतिषशास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। राहु और केतु आकाश में दिखने वाले तारा ग्रह न हो कर केवल गणितीय बिंदु हैं। पृथ्वी और चन्द्रमा की कक्षा के उत्तरी प्रतिच्छेदन बिंदु राहु और दक्षिणी प्रतिच्छेदन बिंदु केतु हैं। मेदिनी ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो राहु से जातिवादी राजनीति, अवसरवाद,


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    By Azad Hind Desk जनवरी 30, 2026
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    ज्योतिषशास्त्र में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है। राहु और केतु आकाश में दिखने वाले तारा ग्रह न हो कर केवल गणितीय बिंदु हैं। पृथ्वी और चन्द्रमा की कक्षा के उत्तरी प्रतिच्छेदन बिंदु राहु और दक्षिणी प्रतिच्छेदन बिंदु केतु हैं। मेदिनी ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो राहु से जातिवादी राजनीति, अवसरवाद, आतंकवादी गतिविधियां, विदेशी षड्यंत्र, स्कैंडल्स आदि देखे जाते हैं। जब राहु गोचर में जन्मकालीन गुरु के ऊपर से आते हैं तो भृगु ज्योतिष के अनुसार यह समय बड़ी उथल-पुथल वाला होता है। ऐसे ही राहु और केतु का गोचर जब जन्म कालीन राहु और केतु के ऊपर से होता है तब राजनेताओं और राजनीतिक दलों की विचारधारा और नीतियों में बड़ी उथल-पुथल मच जाती है।

    वर्तमान में केतु गोचर में सिंह राशि में चल रहे हैं और राहु कुम्भ राशि में हैं जो 26 नवंबर तक इन्हीं राशियों में रहेंगे। गोचर के राहु बीजेपी की स्थापना कुंडली (6 अप्रैल 1980, सुबह 11 बजकर 45 मिनट, दिल्ली) के जन्म कालीन केतु और बुध को कुम्भ राशि में ग्रसित कर रहे हैं। गोचर में केतु सिंह राशि में होकर बीजेपी की स्थापना कुंडली में इसी राशि में बैठे मंगल, शनि, राहु और गुरु के ऊपर से चल कर एक अशुभ योग बना रहे हैं।

    अभी हाल ही में 13 जनवरी को यूजीसी- विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा उच्च शिक्षण संस्थाओं में जातिगत, धर्म, जन्म स्थान और लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने हेतु लायी गयी नई नियमावली का उत्तर और मध्य भारत में अगड़ी जातियों के द्वारा बड़ा विरोध हो रहा है। आजाद भारत (15 अगस्त 1947, मध्य रात्रि, दिल्ली) की वृषभ लग्न की स्थापना कुंडली में आगामी 5 फरवरी 2026 से आने वाली मंगल में राहु की कठिन विंशोत्तरी दशा देश में कुछ बड़े आश्चर्यजनक राजनीतिक परिवर्तनों का संकेत दे रही है।

    UGC के नियमों पर विवाद का ज्योतिषीय कारण
    13 जनवरी 2026 को UGC ने सभी उच्च शिक्षा संस्थाओं में भेदभाव को समाप्त करने हेतु सख्त निगरानी व्यवस्था बनाने के नियम लागू किये। 13 जनवरी मध्य रात्रि को कन्या लग्न उदय हो रहा था और लग्न पर मीन राशि में चल रहे शनि की अशुभ दृष्टि पड़ रही थी। चतुर्थ भाव में लग्नेश और दशमेश बुध का अष्टमेश(विवाद)मंगल से नजदीकी अंशों में युति करना और सूर्य से अस्त होना एक अशुभ योग है जो कि आगे चलकर सुप्रीम कोर्ट के द्वारा UGC के इन नियमों में कुछ बदलाव लाने का कारण बन सकता है। UGC का कहना है की पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों और जनजातियों के साथ विश्वविद्यालयों में भेदभाव की शिकायतों में 2019 से 2025 के बीच दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई है। इन नियमों का विरोध कर रहे छात्रों और शिक्षकों के अनुसार नियम के कुछ सेक्शन विशेष रूप से विवादित हैं। सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। इसमें कहा गया कि नियम का Section 3(C) अभिव्यक्ति की आज़ादी, समानता और व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन हैं।

    ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखें तो इन UGC के नियमों को लागू करने के समय शनि और मंगल का परस्पर दृष्टि संबंध बना है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन नियमों पर स्टे लगाकर इन्हें बाद में कुछ बदलाव के साथ 1 जून के बाद कर्क राशि में गुरु के गोचर के समय संशोधित रूप से लागू करने का संकेत दे रहा है।

    इन दो अशुभ शकुनों के कारण बदल सकती है राज्यों की राजनीति
    मेदिनी ज्योतिष के ग्रन्थ भद्रबाहु संहिता के अनुसार राजा का सवारी से गिरना एक अशुभ शकुन माना जाता है। अभी हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एक सार्वजनिक समारोह में घोड़े की सवारी करते हुए संतुलन बिगड़ने से नीचे गिरने लगे थे। बाद में खुद को संभालते हुए उन्होंने वह कार्यक्रम जारी रखा। उज्जैन के राहगीरी आनंदोत्सव में मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री मोहन यादव के साथ 25 जनवरी को घटित हुआ यह शकुन उनके लिए कोई बड़ी राजनीतिक उथल पुथल का संकेत दे रहा है जिसका प्रभाव अगले 1 वर्ष तक रह सकता है। मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग OBC को 27 प्रतिशत आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस में जल्द बड़ा फैसला भी आ सकता है जिसमें मुख्यमंत्री मंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार को झटका लग सकता है, ऐसी आशंका बनती है।

    मेदिनी ज्योतिष के पांचवी सदी के ग्रंथ बृहत संहिता के अनुसार किसी प्रमुख मंदिर के शिखर का टूटना उस क्षेत्र के राजा के लिए एक अशुभ शकुन माना जाता है। अभी गत 27 जनवरी मंगलवार के दिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में शनि धाम मंदिर पर गिरी बिजली की घटना हुई। शिखर पर गिरी बिजली से त्रिशूल टूट गया। वहीं मंदिर में रखा कलश और नारियल भी टूट गया उत्तरप्रदेश में दिखा यह अशुभ शकुन राज्य में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकता है। माघ मेला में ज्योतिष पीठ(ज्योतिर्मठ) बद्रीनाथ के वर्तमान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इस समय प्रशासन के विरोध में अपने अनुयायियों के साथ धरना दे रहे हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से योगी सरकार की तनातनी बीजेपी को उत्तर प्रदेश में भारी पड़ सकती है।

    राहु के प्रभाव में चल रही बीजेपी इस वर्ष के अंत तक कुछ राज्यों में निजी क्षेत्र के व्यवसायों और शिक्षण संस्थानों में सामाजिक न्याय की नीति लागू कर समाज के वंचित तबके के लिए आरक्षण की कुछ सीमित व्यवस्था ला सकती है जिससे राज्यों की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

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