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  • Russian Oil Import: भारत के इस कदम से चीन की लगी लॉटरी, टैंकर भर-भरकर रूसी तेल खरीद रहा ड्रैगन

    नई दिल्ली: भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। चीन ने इसका भरपूर फायदा उठाया है। चीन रूस से यूराल क्रूड (Urals crude) तेल का आयात लगभग तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर कर रहा है। यह तेल चीन को ईरान के तेल से भी सस्ती कीमत पर मिल रहा है।


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    By Azad Hind Desk जनवरी 19, 2026
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    नई दिल्ली: भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है। चीन ने इसका भरपूर फायदा उठाया है। चीन रूस से यूराल क्रूड (Urals crude) तेल का आयात लगभग तीन साल के सबसे ऊंचे स्तर पर कर रहा है। यह तेल चीन को ईरान के तेल से भी सस्ती कीमत पर मिल रहा है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण भारत ने रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया है। साथ ही, यूरोपीय संघ (ईयू) भी अब रूस से बने तेल उत्पादों पर बैन लगाने वाला है।

    रॉयटर्स ने यह जानकारी व्यापारिक सूत्रों और शिपिंग डेटा से दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव और रूस के तेल उत्पादकों पर लगे कड़े पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण भारतीय रिफाइनरियों ने दिसंबर में रूस से तेल खरीदना कम कर दिया था। उन्होंने दूसरे विकल्पों की तलाश शुरू कर दी थी। भारत की सबसे बड़ी तेल खरीदार कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जनवरी में रूस से तेल खरीदना पूरी तरह बंद कर दिया। रिलायंस यूरोप को अपने तेल उत्पाद बेचती है।
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    कितना तेल खरीद रहा चीन

    भारत की ओर से रूस के तेल की मांग कम होने से चीन को सस्ता रूसी कच्चा तेल आसानी से मिल रहा है। यह चीन के लिए एक बड़ी राहत है, क्योंकि अमेरिका ने वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाए थे और वहां से तेल की बिक्री पर नियंत्रण कर लिया था। इससे चीन को वेनेजुएला से मिलने वाला तेल कम हो गया था।

    विश्लेषक फर्म केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के अनुसार, इस महीने अब तक चीन हर दिन 4,05,000 बैरल रूसी यूराल क्रूड तेल आयात कर रहा है। यह जून 2023 के बाद सबसे ज्यादा है। कुल मिलाकर, चीन रूस से समुद्री रास्ते से करीब 14 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आयात कर रहा है। एक दूसरी डेटा फर्म वोर्टेक्सा (Vortexa) के मुताबिक, दिसंबर में चीन का समुद्री रास्ते से रूसी कच्चे तेल का आयात 15 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ऊपर चला गया था। यह साल 2025 के पहले ग्यारह महीनों के औसत 12 लाख बैरल प्रति दिन से काफी ज्यादा है।

    भारत ने घटाया आयात

    केप्लर के आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में दिसंबर में यूराल क्रूड का आयात घटकर 9,29,000 बैरल प्रतिदिन रह गया था। यह दिसंबर 2022 के बाद सबसे कम है। साल 2024 में यह औसत 13.6 लाख बैरल प्रतिदिन और साल 2025 में 1.27 12.7 लाख बैरल प्रतिदिन था।

    ऑइल प्रोडक्ट पर भी बैन

    सूत्रों के मुताबिक भारत और तुर्की की वे रिफाइनरियां जो यूरोप को डीजल बेचती हैं, उन्होंने यूराल क्रूड को खरीदना बंद कर दिया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 21 जनवरी से ईयू रूसी मूल के कच्चे तेल से बने ईंधन पर बैन लगाने वाला है। जो रिफाइनरियां यूरोप को माल बेचती हैं, उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्रोडक्ट कम से कम दो महीने तक रूसी कच्चे तेल से न बने हों, तभी वे यूरोपीय बाजार में बेचे जा सकेंगे। दूसरी ओर चीन यूरोप को बहुत कम तेल उत्पाद निर्यात करता है।

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