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  • Russian Oil: चीन की ओर मुड़ गए भारत आने वाले रूसी तेल के टैंकर, मॉस्को ने ड्रैगन को दे दिया बड़ा ऑफर

    नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील ने रूसी तेल के आयात पर भी ब्रेक लगा दिए हैं। अमेरिका ने भारत पर लगाए 50 में से 25 फीसदी टैरिफ सिर्फ इसी शर्त पर हटाया है कि दिल्ली रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करे। साथ ही भारत को अब अमेरिका और वेनेजुएला से


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    By Azad Hind Desk फरवरी 7, 2026
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    नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील ने रूसी तेल के आयात पर भी ब्रेक लगा दिए हैं। अमेरिका ने भारत पर लगाए 50 में से 25 फीसदी टैरिफ सिर्फ इसी शर्त पर हटाया है कि दिल्ली रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करे। साथ ही भारत को अब अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदना होगा। इसका असर दिखाई भी दिया। भारत ने अब रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया है। वहीं रूस अब चीन को ज्यादा तेल बेच रहा है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद रूस ने तेल की कीमत और घटा दी है। उसने चीन को सस्ता तेल खरीदने का ऑफर भी दिया है।

    रॉयटर्स के मुताबिक इस हफ्ते रूस से चीन को होने वाले तेल निर्यात पर छूट काफी बढ़ गई है। तेल बेचने वाले दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल खरीदार, चीन से मांग बढ़ाने के लिए दाम कम कर रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भारत से होने वाली संभावित बिक्री में कमी की भरपाई की जा सके। अगर भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया, तो चीन ही सस्ते रूसी तेल का एकमात्र बड़ा खरीदार रह जाएगा। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक रूस पहले से ही पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण भारत से घटती मांग से जूझ रहा है। इस वजह से रूस का तेल जहाजों में जमा हो रहा है।
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    चीन ने कितनी बढ़ाई खरीदारी?

    • जनवरी 2026 रूस और चीन के बीच तेल व्यापार का सबसे मजबूत महीना साबित हुआ है।
    • केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में चीन का रूस से समुद्री रास्ते से कच्चा तेल आयात बढ़कर रिकॉर्ड 17 लाख बैरल प्रति दिन हो गया।
    • OilX के अनुसार चीन ने जनवरी में 16.4 लाख बैरल प्रति दिन रूसी तेल आयात किया जो मार्च 2024 के बाद सबसे ज्यादा था।
    • ऑइलप्राइसडॉटकॉम की एक खबर के मुताबिक जनवरी में समुद्र के रास्ते रूस से 18.6 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तेल चीन भेजा गया। यह पिछले साल जनवरी 2025 के रिकॉर्ड को भी पार कर गया।

    स्वतंत्र रिफाइनर उठा रहे फायदा

    जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों (इनमें नताशा केनेवा भी शामिल हैं) ने 4 फरवरी के एक नोट में लिखा है कि चीन के स्वतंत्र रिफाइनर इस स्थिति का सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। वे भारी छूट और घरेलू नीतियों के सहारे रूस से आने वाले ज्यादातर तेल को खरीद रहे हैं। इससे उनकी कमाई बढ़ रही है, उत्पादन बढ़ रहा है और रणनीतिक भंडार भी मजबूत हो रहा है।

    क्या भारत बंद कर देगा आयात?

    जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों (इनमें नताशा केनेवा भी शामिल हैं) का मानना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद भी भारत हर दिन 8 लाख से 10 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदेगा। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 17 से 21% होगा। पिछले साल जून में भारत रूस से हर दिन करीब 20 लाख बैरल तेल खरीद रहा था। केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम है।

    रूस ने कितनी बढ़ाई छूट?

    व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक चीन को भेजे जाने वाले रूसी ESPO Blend तेल पर छूट इस हफ्ते बढ़कर लगभग 9 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। पिछले कुछ महीनों में यह छूट 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल थी। वहीं बाल्टिक सागर से निर्यात होने वाले रूसी यूराल्स (Urals) ग्रेड तेल पर छूट लगभग 12 डॉलर प्रति बैरल है। यही यूराल्स तेल आमतौर पर भारत को भेजा जाता है। सूत्रों का कहना है कि यह छूट और भी बढ़ सकती है।

    जानकारों के मुताबिक चीनी खरीदार हाल के महीनों में रूसी कच्चे तेल पर कई सालों की सबसे कम छूट का फायदा उठा रहे हैं। वे इतना ज्यादा रूसी तेल खरीद रहे हैं कि उन्होंने ईरान से तेल लेना भी कम कर दिया है। चूंकि भारत के पीछे हटने से छूट और भी ज्यादा होने की संभावना है, इसलिए आने वाले समय में भी ऐसा ही होता रहेगा।

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