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  • Safer Internet Day: अडल्ट कॉन्टेंट से बच्चों को ऐसे रखें दूर, अकेला छोड़ने से पहले जान लें कुछ बातें

    Safer Internet Day 10 फरवरी पर विशेष: अब बच्चों की पढ़ाई के लिए मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट बेहद ज़रूरी हो गए हैं। लेकिन इनकी वजह से बच्चे अडल्ट और आपत्तिजनक कॉन्टेंट तक भी आसानी से पहुंच रहे हैं। पैरंट्स 24 घंटे तो इनकी निगरानी नहीं कर सकते और न ही यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से


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    By Azad Hind Desk फरवरी 8, 2026
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    Safer Internet Day 10 फरवरी पर विशेष: अब बच्चों की पढ़ाई के लिए मोबाइल, लैपटॉप या टैबलेट बेहद ज़रूरी हो गए हैं। लेकिन इनकी वजह से बच्चे अडल्ट और आपत्तिजनक कॉन्टेंट तक भी आसानी से पहुंच रहे हैं। पैरंट्स 24 घंटे तो इनकी निगरानी नहीं कर सकते और न ही यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से छुटकारा पा सकते हैं कि इन्हें ज्यादा यूज़ मत करो। इसलिए ऐसे तरीके जानें जिससे बच्चों को इस तरह के कॉन्टेंट से दूर रखा जा सके। ऐसे ऐप्स और तरीके बता रहे हैं वरुण आनंद।

    AI ने बहुत-से काम आसान किए हैं, लेकिन अब इसका ‘मिसयूज़’ भी होने लगा है। बीते दिनों AI चैटबॉट Grok का इस्तेमाल न्यूड तस्वीरें बनाने के लिए करने पर विवाद खड़ा हो गया। लेकिन केवल AI ही नहीं, सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर भी ऐसे कॉन्टेंट की बाढ़ आ चुकी है। चाहे कोई विडियो स्ट्रीमिंग प्लैटफॉर्म हो या फिर रील्स, हर जगह ऐसा कॉन्टेंट बनाया और परोसा जा रहा है। फिल्मों और वेबसीरीज़ को लेकर तो नियम बनाए गए हैं, लेकिन ऐसे प्लैटफॉर्म के लिए कोई नियम न होना और आसानी से इन तक पहुंच होना गंभीर खतरा बन चुका है।

    कहां-कहां है ऐसा कॉन्टेंट

    अडल्ट और अश्लील कॉन्टेंट अब केवल अलग-अलग वेबसाइटों तक सीमित नहीं रह गया है। यह कई ऐसे प्लैटफॉर्म पर भी आसानी से मिल रहा है, जिन्हें आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। बच्चों की पहुंच जिन जगहों तक सबसे ज्यादा है, वहीं यह कॉन्टेंट अलग-अलग रूपों में मौजूद है, जैसे:

    सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म: रील्स, शॉर्ट्स और स्टोरीज़ के जरिए अश्लील इशारों, डांस या भड़काऊ विजुअल्स वाला कॉन्टेंट तेजी से परोसा जा रहा है। एल्गोरिद्म बार-बार ऐसे विडियो का सुझाव देता है, जिससे बच्चा अनजाने में इसी तरह के कॉन्टेंट की ओर खिंचता चला जाता है।विडियो स्ट्रीमिंग प्लैटफॉर्म: फिल्मों और वेबसीरीज़ के लिए उम्र आधारित नियम तो हैं, लेकिन कई बार ट्रेलर, क्लिप्स और सीन बिना किसी साफ चेतावनी के सामने आ जाते हैं, जिन्हें बच्चे भी आसानी से देख लेते हैं।

    गेमिंग प्लैटफॉर्म और इन-गेम चैट: ऑनलाइन गेम्स के भीतर चैट फीचर, कस्टम अवतार और थर्ड-पार्टी लिंक के जरिए अश्लील भाषा और कॉन्टेंट तक पहुंच बन जाती है, जिस पर पैरंट्स का ध्यान कम ही जाता है।

    सिर्फ ‘मत देखो’ कहना काफी नहीं

    पैरंट्स अक्सर यह मान लेते हैं कि बच्चों को सख्त शब्दों में मना कर देने से प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी, लेकिन आज के डिजिटल दौर में यह तरीका न तो कारगर है और न ही प्रैक्टिकल। मोबाइल और इंटरनेट बच्चों की पढ़ाई, दोस्ती और मनोरंजन का हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में सिर्फ ‘फोन मत देखो’ या ‘ऐसा कॉन्टेंट मत देखना’ कहना बच्चों को रोकने के बजाय उन्हें छुपकर देखने की ओर धकेल सकता है। तकनीक के इस्तेमाल को पूरी तरह रोकने के बजाय उसे सुरक्षित और सीमित करने पर फोकस करना ज्यादा असरदार होता है।

    इन ऐप्स के जरिए कर सकते हैं निगरानी

    1. Watcher-Parental Control

    यह मोबाइल ऐप पैरंट्स बच्चे के स्मार्टफोन को रिमोटली मॉनिटर और कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लाइव स्क्रीन शेयरिंग, फोटो और विडियो गैलरी तक एक्सेस, लाइव लोकेशन ट्रैकिंग, कॉल रिकॉर्डिंग और फाइल ट्रांसफर जैसे फीचर्स से उनके मोबाइल की पूरी निगरानी कर सकते हैं। यह केवल एंड्राइड के लिए है।

    2. ScrinTrim; Break Screen-Time!

    अगर बच्चा छोटा है और वह पैरंट्स का ही स्मार्टफोन इस्तेमाल करता है तो यह ऐप उसे ज्यादा मोबाइल के इस्तेमाल से रोकेगा। इसमें टाइम सेट किया जा सकता है। उतने टाइम के बाद मोबाइल फोन की ब्राइटनेस अपने आप बंद हो जाएगी और नोटिफिकेशन पैनल नीचे आ जाएगा। बच्चे को लगेगा कि फोन सही से काम नहीं कर रहा और वह इसे वापस कर देगा।

    3. FlashGet Kids: parental control

    इस ऐप से बच्चे के फोन की रीयल-टाइम निगरानी के साथ मोबाइल इस्तेमाल को सीमित किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो वह कहां है, उसके फोन के कैमरे के सामने क्या है, उसके आस-पास क्या आवाजें आ रही हैं, ये सब आप इस ऐप से पता लगा सकते हैं। इस ऐप के जरिए पैरंट्स तय कर सकते हैं कि बच्चा अपने मोबाइल फोन में कौन-कौन से ऐप यूज़ कर सकता है।

    4. Screen Time

    आईफोन यूज़र बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखना चाहते हैं तो उसमें Screen Time मददगार साबित होगा। यह Apple का फीचर है, न कि कोई अलग से ऐप। यह स्क्रीन टाइम घटाने में मदद करता है। एंड्रॉइड में इसी तरह का फीचर Digital Wellbeing नाम से आता है। इसमें हर दिन की टाइम लिमिट सेट कर सकते हैं।

    5. Google Family Link

    अगर बच्चे की उम्र 13 साल से कम है और वह अलग मोबाइल फोन इस्तेमाल करता है तो उसकी निगरानी के लिए यह मददगार साबित होगा। इसमें बच्चे का Gmail अकाउंट बनाना होता है, जिसके साथ पैरंट के Gmail अकाउंट की भी जानकारी डालनी होती है। बच्चा कौन-कौन से ऐप यूज़ करे, साथ ही रात में कितने बजे के बाद उसका फोन लॉक हो जाए, यह सब इस ऐप के जरिए तय कर सकते हैं।

    …और भी हैं ऐप्स

    बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखने के लिए और भी ऐप मौजूद हैं जैसे- Parental Control – Kids Place, StayFree – Screen Time, Qustodio Parental Control App, Norton Family Parental Control आदि।

    ऐसे प्लैटफॉर्म्स की सेंटिग बदलें

    इन ऐप्स पर कुछ सेटिंग्स से रोक सकते हैं आपत्तिजनक कॉन्टेंट:

    Youtube

    YouTube पर बच्चे काफी समय बिताते हैं। यहां आपत्तिजनक कॉन्टेंट तक उनकी पहुंच सीमित रखने के लिए कुछ ज़रूरी सेटिंग्स की जा सकती हैं। मोबाइल पर इसकी सेटिंग्स में जाकर General के ऑप्शन से Restricted Mode ऑन कर सकते हैं। इससे अडल्ट कॉन्टेंट उनके सामने नहीं आएगा और ऐसे विडियो अपने-आप फ़िल्टर हो जाएंगे। इसके अलावा बच्चे के अकाउंट को Google Family Link से जोड़कर उनकी उम्र के हिसाब से कॉन्टेंट कंट्रोल किया जा सकता है। छोटे बच्चों के लिए YouTube Kids बेहतर ऑप्शन है, जहां कॉन्टेंट पहले से क्यूरेटिड होता है और पैरंट्स सर्च, स्क्रीन टाइम और विडियो कैटिगरी तय कर सकते हैं। साथ ही Watch History और Search History को समय-समय पर चेक करते रहें।

    Instagram

    Instagram पर बच्चों के लिए सेफ्टी सेटिंग्स करना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि यहां रील्स और एक्सप्लोर सेक्शन के जरिए खराब कॉन्टेंट तेजी से सामने आ सकता है। पैरंट्स सबसे पहले बच्चे के अकाउंट को Private Account में बदलें, ताकि अनजान लोग फॉलो न कर सकें। इसके बाद ऐप की Settings and activity में जाकर Content preferences के ऑप्शन पर जाएं। यहां Sensitive content के ऑप्शन पर क्लिक करके उसे Less पर सेट कर दें। इससे अश्लील और भड़काऊ पोस्ट्स की बच्चे तक पहुंच कम हो जाएगी। इसके Hidden words ऑप्शन के जरिए अश्लील शब्दों, गालियों और आपत्तिजनक कमेंट्स को फिल्टर कर सकते हैं। साथ ही, Comments और Messages में यह तय किया जा सकता है कि कौन बच्चे को मेसेज या कमेंट कर सकता है। अगर बच्चा 18 साल से कम उम्र का है तो Instagram के Teen Safety Features अपने-आप कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं, लेकिन पैरंट्स को समय-समय पर Reels, Following लिस्ट और ऐक्टिविटी ज़रूर चेक करनी चाहिए।

    ChatGPT

    ChatGPT जैसे AI टूल्स पढ़ाई, सवाल-जवाब और सामान्य बातों की जानकारी के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन बिना निगरानी के इस्तेमाल पर जोखिम भी हो सकता है। ChatGPT में पैरंट्स बच्चों को फैमिली अकाउंट से जोड़कर उनके इस्तेमाल पर नजर रख सकते हैं। ChatGPT पर जहां आपका नाम दिखेगा, वहां Parental controls का ऑप्शन दिखेगा। इसमें Add family member में बच्चे को जोड़ें और उसके जरिए बच्चे को ChatGPT इस्तेमाल करने दें। इससे बच्चा इस टूल का इस्तेमाल कितना और किस तरह से करेगा, यह पैरंट्स कंट्रोल कर सकते हैं।

    Google Gemini

    सबसे पहले बच्चे का Google अकाउंट Family Link से मैनेज करें, ताकि उम्र के हिसाब से कॉन्टेंट और फीचर्स पर कंट्रोल रहे। इसके लिए प्ले स्टोर के जरिए फैमिली लिंक ऐप को डाउनलोड करें। बच्चे का Gmail अकाउंट इस ऐप से जोड़ें। फिर इसी ऐप में Google Parental अकाउंट जोड़ें। अब इसमें Child Account का ऑप्शन सिलेक्ट करें। कंट्रोल्स ऐप्स में जाकर Gemini ऑप्शन चुनें। यहां से बच्चे के Gemini को यूज़ करने को कंट्रोल कर सकते हैं।

    ये ऐप भी हैं काम के

    Net Nanny: यह एक पैरंटल कंट्रोल सॉफ्टवेयर और ऐप है जो पैरंट्स को अपने बच्चों की ऑनलाइन ऐक्टिविटी पर ज्यादा कंट्रोल देता है। इसकी मदद से पैरंट्स बच्चों को इंटरनेट पर मौजूद अश्लील, हिंसक और नुकसानदायक कॉन्टेंट से बचा सकते हैं। यह रीयल-टाइम वेब फिल्टरिंग के जरिए अडल्ट वेबसाइट्स को ब्लॉक करता है, स्क्रीन टाइम तय करने देता है और यह भी दिखाता है कि बच्चा किन ऐप और साइट्स का इस्तेमाल कर रहा है। पैरंट्स तुरंत अलर्ट हो सकते हैं और कुछ ऐप या इंटरनेट एक्सेस को तुरंत रोक सकते हैं। Net Nanny में लोकेशन ट्रैकिंग जैसे फीचर्स भी हैं। यह Android और iOS दोनों प्लैटफॉर्म पर मौजूद है।

    Canopy: यह एक स्मार्ट पैरंट्ल कंट्रोल ऐप और डिजिटल सेफ्टी टूल है। यह ऐप रियल-टाइम में AI-पावर्ड फिल्टरिंग का इस्तेमाल करता है, जिससे वेबसाइट्स, विडियो और इमेज को पहले ही स्कैन कर बहुत जल्दी किसी भी अश्लील कॉन्टेंट को ब्लॉक कर दिया जाता है। यह सिर्फ साइट ब्लॉक ही नहीं करता बल्कि कई बार सुझाए जा रहे अश्लील इमेज/विडियो को भी पहचानकर रोक देता है, ताकि बच्चा गलती से भी उसे न देख सके। यह ऐप Android और iOS दोनों के लिए है।

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