संन्यास की मुख्य वजह
साइना नेहवाल ने अपने फैसले के पीछे की दर्दनाक सच्चाई को साझा करते हुए बताया कि उनके घुटनों का कार्टिलेज (नरम हड्डी) पूरी तरह से खराब हो चुका है और वह अर्थराइटिस से जूझ रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में शामिल रहने के लिए रोजाना 8 से 9 घंटे की ट्रेनिंग जरूरी होती है, लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति ऐसी है कि उनके घुटने महज एक-दो घंटे की ट्रेनिंग के बाद ही सूज जाते थे। साइना ने कहा, ‘मैंने अपने माता-पिता और कोच को साफ बता दिया था कि अब इसे आगे खींचना मुश्किल है।’
खामोशी से लिया विदा होने का फैसला
दिलचस्प बात यह है कि साइना ने पिछले दो सालों से किसी पेशेवर मुकाबले में हिस्सा नहीं लिया था। उनकी आखिरी प्रतियोगिता 2023 का सिंगापुर ओपन थी। संन्यास की घोषणा में देरी पर उन्होंने कहा, ‘मैंने खेल की शुरुआत अपने दम पर की थी और अंत भी अपनी शर्तों पर किया, इसलिए मुझे इसकी औपचारिक घोषणा करना बहुत बड़ा मुद्दा नहीं लगा। मुझे लगा कि धीरे-धीरे लोग खुद समझ जाएंगे कि अब साइना नहीं खेल रही है।’
रियो 2016 की चोट और शानदार वापसी का जज्बा
साइना के करियर में 2016 के रियो ओलंपिक में लगी घुटने की चोट एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस चोट ने उनके करियर की रफ्तार को प्रभावित किया, लेकिन उनके भीतर के चैंपियन ने हार नहीं मानी। उन्होंने 2017 में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता और 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर एक बार फिर तिरंगा लहराया। हालांकि, बार-बार उभरने वाली घुटनों की समस्या अंततः उनके करियर पर भारी पड़ी।














