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  • Sakat Chauth Vrat Katha: सकट चौथ व्रत कथा, इसके पाठ से सभी मनोकामनाएं होंगी पूरी, पाएंगे व्रत का पूर्ण फल

    सकट चौथ व्रत कथा | Sakat Chauth Vrat Katha in Hindi सतयुग में हरिश्चंद्र नाम के एक सत्यवादी राजा थे, जो साधू-सेवी व धर्मात्मा थे। उनके राज्य में कोई भी व्यक्ति कभी दुखी नहीं रहता था। वहां एक ऋषि शर्मा नामक ब्राह्मण रहते थे। उनका एक पुत्र हुआ और फिर, कुछ समय पश्चात ब्राह्मण की


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    By Azad Hind Desk जनवरी 6, 2026
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    सकट चौथ व्रत कथा | Sakat Chauth Vrat Katha in Hindi


    सतयुग में हरिश्चंद्र नाम के एक सत्यवादी राजा थे, जो साधू-सेवी व धर्मात्मा थे। उनके राज्य में कोई भी व्यक्ति कभी दुखी नहीं रहता था। वहां एक ऋषि शर्मा नामक ब्राह्मण रहते थे। उनका एक पुत्र हुआ और फिर, कुछ समय पश्चात ब्राह्मण की मृत्यु हो गई है। उस समय ब्राह्मणी ने बहुत दुखी होकर भी अपने पुत्र का पालन किया और गणेश चौथ का व्रत करने लगी। एक दिन ब्राह्मणी का पुत्र भगवान गणेश की प्रतिमा को लेकर खेलने के लिए निकल गया। वहां एक दुष्ट कुम्हार ने बालक को आवा में रखकर आग लगा दी।

    जब बालक घर वापस नहीं पहुंचा तो ब्राह्मणी बहुत चिंतित हो गई और भगवान गणेश से अपने पुत्र के लिए प्रार्थना करने में लग गई है। ब्राह्मणी ने कहा- ‘अनाथों के नाथ मेरी रक्षा कीजिए, मैं आपके शरण में आई हूं।’ ऐसा कहकर वह पूरी रात्रि विलाप करती रही। प्रात: काल कुम्हार अपने पके हुए बर्तनों को देखने के लिए पहुंचा। उसने पाया की बालक वैसा है और आवा में जंघा तक जल भर आया है। उसे देखकर कुम्हार चकित हो गया और उसने राजा के पास जाकर सारी बात बताई।

    कुम्हार ने कहा, महाराज! मुझसे अनर्थ हो गया। मैंने अनर्थ कर दिया, मैं दंड का भागी हूं। मुझे मृत्यु दंड मिलना चाहिए। मैंने अपनी कन्या के विवाह के लिए बर्तनों का आवा लगाया था। लेकिन बर्तन न पके। तब मुझे एक जानकार ने टोटका बताया कि बालक की बलि देने से आवा पक जाएगा। मैंने उस बालक की बली लेकिन, अब वह बालक खेल रहा है और आवा में जल भर आया है। तभी वहां ब्राह्मणी आ पहुंची और अपने बालक को उठाकर अपने कलेजे से लगा लिया। राजा हरिश्चंद्र ने उस ब्राह्मणी से सवाल किया, आखिर ऐसा क्या चमत्कार हुआ? तुम ऐसा कौन-सा व्रत, तप करती हो अथवा ऐसी कौन-सी विधि है जिससे ये चमत्कार संभव हुआ है।
    ब्राह्मणी ने उत्तर दिया, महाराज! मुझे कोई विधि नहीं मालूम है और न ही मैं कोई तप जानती हूं। मैं केवल संकट गणेश नामक चौथ का व्रत करती हूं। इसी व्रत के प्रभाव से मेरा पुत्र कुशलपूर्वक है। मान्यता है कि सकट चौथ व्रत के दिन इस कथा का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो सकती हैं और संतान के सुख की प्राप्ति होती है।

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