इन नामों का श्रवण करें अथवा इन नामों को संकट चतुर्थी के शुभ मुहूर्त में अथवा किसी पर्व पर अपने बड़े-बुजुर्ग से लिखवाकर अपनी तिजोरी, गल्ले, अलमारी में रख सकते हैं। गणेश जी के आगमन से सद्बुद्धि आती है, जिससे मां लक्ष्मी का वास घर-परिवार में खुशहाली लाता है।
माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, संकट या संकटा चौथ कहलाती है। इसे वक्रतुंडी चतुर्थी, माही चौथ, तिल अथवा तिलकूट चतुर्थी व्रत भी कहते हैं। मंगलमूर्ति और प्रथम पूज्य भगवान गणेश को संकटहरण भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस चतुर्थी के दिन व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा करने से जहां सभी कष्ट दूर हो जाते हैं वहीं इच्छाओं और कामनाओं की पूर्ति भी होती है। इस दिन तिल दान करने का विशेष महत्व होता है। इस
दिन गणेशजी को तिल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। शास्त्रों के मुताबिक देवी-देवताओं में सर्वोच्च स्थान रखने वाले विघ्न विनाशक भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि में बढ़ोत्तरी होती है।
माघ मास की चतुर्थी के दिन मंगलमूर्ति श्री गणेश भगवान को पंचामृत से स्नान के बाद फल, लाल फूल, अक्षत, रोली, मौलि अर्पित करना चाहिए। तिल से बनी वस्तुओं अथवा तिल-गुड़ से बने लड्डुओं का भोग लगाना चाहिए। गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ अवश्य करना चाहिए। पुराणों में संकट चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान गणेश की अर्चना के साथ चंद्रोदय के समय अर्घ्य देने का विधान है। खासकर महिलाओं के लिए इस व्रत को उपयोगी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक मन के स्वामी अथवा अधिपति चंद्रद्रेव है, संकटा चतुर्थी बुद्धिदाता देवता श्री गणेश की पूजा के साथ चंद्रदेव को अर्घ्य देकर मानसिक संताप को दूर करने व मनोरथपूर्ति के लिए बहुत शुभ मानी जाती है। संकटा चतुर्थी पर चंद्र अर्घ्य के पीछे सुख व शांति की ऐसी ही कामनाएं व भावनाएं जुड़ी है।













