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  • Saraswati Puja 2026 Muhurat : बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए कुछ ही घंटों का बेहद शुभ मुहूर्त, जानें समय और संपूर्ण पूजा विधि

    बसंत पंचमी का पर्व हर साल माघ मास की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान के साथ करता है उसे


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    By Azad Hind Desk जनवरी 22, 2026
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    बसंत पंचमी का पर्व हर साल माघ मास की पंचमी तिथि के दिन मनाया जाता है। इस दिन माता सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसलिए इसे सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन मां सरस्वती की पूजा अर्चना पूरे विधि विधान के साथ करता है उसे ज्ञान की प्राप्ति होती है। साथ ही विद्यार्थियों के पढ़ाई में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। मान्यता है कि इस दिन से बसंत ऋतु का आगमन होता है। आइए जानते हैं बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहने वाले है। साथ ही जानें सरस्वती पूजा की संपूर्ण विधि।

    बसंत पंचमी 2026 सरस्वती पूजा मुहूर्त

    सरस्वती पूजा के लिए वैसे तो किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं है क्योंकि, इस दिन अबूझ मुहूर्त माना जाता है लेकिन, विशेष रुप से शुभ चौघडिया मुहूर्त में की गई पूजा पाठ से ज्ञान की प्राप्ति होती है। विद्यार्थियों के लिए यह मुहूर्त विशेष रुप से लाभकारी माना गया है। जिन बच्चे का शिक्षा संस्कार इस दिन किया जाता है उन्हें भी मुहूर्त का ख्याल करते हुए ही पूजा करनी चाहिए।

    • चल चौघडिया सुबह में 7 बजकर 13 मिनट से 8 बजकर 33 मिनट तक
    • लाभ चौघडिया सुबह में 8 बजकर 33 मिनट से 9 बजकर 53 मिनट तक
    • अमृत चौघडिया सुबह 9 बजकर 53 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक

    बसंत पंचमी 2026 सरस्वती पूजा विधि और मंत्र ( Saraswati Puja Vidhi and Mantra )
    सरस्वती पूजा के लिए सबसे पहले पूजा स्थाल को अच्छे से गंगाजल से साफ कर लें।
    इसके बाद सरस्वती माता की प्रतिमा एक चौकी पर स्थापित करें और उस लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछा लें।
    इसके बाद धूप, दीप और गुगल जलाएं और फिर पूजा का आरंभ केरं।
    सबसे पहले माता सरस्वती का ध्यान करें।
    “ऊं अपवित्र: पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोऽपिवा। य: स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तर: शुचि:॥” इस मंत्र का जप करें और पीले फूल अपने आसन पर तीन बार अर्पित करें। ऐसे करने से आपका आसन शुद्ध होगा।
    इसके बाद ऊं केशवाय नम:, ऊं माधवाय नम:, ऊं नारायणाय नम: मंत्र का जप करते हुए अपने हाथ धोएं इसके बाद ऊं पृथ्वी त्वयाधृता लोका देवि त्यवं विष्णुनाधृता। त्वं च धारयमां देवि पवित्रं कुरु चासनम्॥ मंत्र बोले ।
    अब ‘चन्दनस्य महत्पुण्यम् पवित्रं पापनाशनम्, आपदां हरते नित्यम् लक्ष्मी तिष्ठतु सर्वदा।’ मंत्र कहते हुए चंदन लगाएं।

    अब हाथ में तिल, फूल, अक्षत, मिठाई, फल आदि लेकर ‘यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः माघ मासे बसंत पंचमी तिथौ भगवत्या: सरस्वत्या: पूजनमहं करिष्ये।’ मंत्र लेकर सभी चीजें एक एक करके मां सरस्वती को अर्पित कर दें। इसके बाद गणपति जी की पूजा करें।
    अब गणेश जी का ध्यान करते हुए बोले गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।
    अब हाथ में थोड़े अक्षत लेकर गणपति की का आह्वान करें और बोलें ‘ऊं गं गणपतये इहागच्छ इह तिष्ठ।। अब अक्षत अर्पित कर दें।
    अब गणेश जी को तिलक करें और तिलक करते समय बोले एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम् ऊं गं गणपतये नम:। रक्त चंदन लगाएं: इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ऊं गं गणपतये नम:
    अब गणेश जी को सिंदूर अर्पित करें और बोले इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ऊं गं गणपतये नम:। इसे के साथ गणेशजी को दूर्वा अर्पित कर दें। अब वस्त्र अर्पित करें और बोलें ऊं गं गणपतये समर्पयामि।
    अब गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें। इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र: इदं शर्करा घृत युक्त नैवेद्यं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:। अब गणेशजी को पान और सुपारी अर्पित करें और बोलें इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं गं गणपतये समर्पयामि:।
    अब गणेशजी को फूल अर्पित करें और बोलें एष: पुष्पान्जलि ऊं गं गणपतये नम:।
    सरस्वती पूजा विधि
    इसके बाद एक घड़ा लें और घड़े पर मौली बांध दें। उसके ऊपर पंच पल्लव रखें।
    कलश के अंदर सुपारी, दूर्वा, अक्षत, मुद्रा रखें। कलश के गले में मौली लपेटें।
    इसके बाद नारियल पर वस्त्र लपेट कर कलश पर रखें।
    अब कलश को हाथ में लेकर वरुण देव का ध्यान करते हुए बोलें ओ३म् त्तत्वायामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदाशास्ते यजमानो हविभि:। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मान आयु: प्रमोषी:।
    अब सरस्वती माता का ध्यान करते हुए बोलें
    या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
    या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।।
    या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
    सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
    शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं।
    वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।
    हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
    वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।

    इसके बाद हाथ में थोड़े अक्षत लें और बोलें “ॐ भूर्भुवः स्वः सरस्वती देव्यै इहागच्छ इह तिष्ठ। फिर अक्षत छोड़े। इसके बाद जल लेकर ‘एतानि पाद्याद्याचमनीय-स्नानीयं, पुनराचमनीयम्।” और जल को अर्पित करें। अब प्रतिष्ठा के बाद स्नान कराएं: ॐ मन्दाकिन्या समानीतैः, हेमाम्भोरुह-वासितैः स्नानं कुरुष्व देवेशि, सलिलं च सुगन्धिभिः।। ॐ श्री सरस्वतयै नमः।। बोलते हुए मां सरस्वती को स्नान कराएं।
    इसके बाद वस्त्रं समर्पयामि बोलते हुए वस्त्र अर्पित करें।
    चंदन का तिलक करें। ॐ मन्दार-पारिजाताद्यैः, अनेकैः कुसुमैः शुभैः। पूजयामि शिवे, भक्तया, सरस्वतयै नमो नमः।।
    अब फूल अर्पित करें और बोलें ॐ सरस्वतयै नमः, पुष्पाणि समर्पयामि।’
    इसके बाद इदं नानाविधि नैवेद्यानि ऊं सरस्वतयै समर्पयामि” मंत्र बोलते हुए नैवैद्य अर्पित करें।
    अब मां सरस्वती को भोग लगाएं और “इदं शर्करा घृत समायुक्तं नैवेद्यं ऊं सरस्वतयै समर्पयामि” बालते हुए प्रसाद अर्पित कर दें।
    प्रसाद के बाद मां सरसवती को सुपारी और पान अर्पित करें और बोलें इदं ताम्बूल पुगीफल समायुक्तं ऊं सरस्वतयै समर्पयामि। अंत में एक फूल लेकर उसमें चंदन और अक्षत लगाकर किताब कॉपी पर रखें। और रखते हुए बोलें एष: पुष्पान्जलि ऊं सरस्वतयै नम:।
    अंत में मां सरस्वती की आरती करें और सभी को प्रसाद वितरित करें।

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