सरदार पटेल की योजना कांग्रेस सरकारों ने लटकाई
मोदी आर्काइव पर दी गई जानकारी के अनुसार, 1946 में (नरेंद्र मोदी के जन्म से भी पहले) सरदार वल्लभभाई पटेल ने नर्मदा नदी के जल का दोहन करने की परिकल्पना की थी। हालांकि, उनके निधन के बाद, यह परियोजना कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकारों के तहत पांच दशकों से अधिक समय तक लालफीताशाही, देरी और अनिर्णय के कारण अटकी रही।
तब CM रहे मोदी ने 51 घंटे का रखा था उपवास
अप्रैल 2006 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने यूपीए सरकार द्वारा बांध की ऊंचाई बढ़ाने से इनकार करने के विरोध में 51 घंटे का चर्चित उपवास किया और लाखों किसानों के जीवनयापन के लिए संघर्ष किया।
पीएम शपथ लेने के 17 दिनों में लगवा दिए गेट
नीतिगत गतिरोध का दौर 2014 में अचानक समाप्त हो गया। प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने के मात्र 17 दिनों के भीतर नरेंद्र मोदी ने गेट लगाने की अंतिम मंजूरी दे दी। यह एक ऐसा निर्णय जो लगभग एक दशक से रुका हुआ था।
कच्छ के रन तक पहुंचता है नर्मदा का पानी
17 सितंबर 2017 को प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्ण हुए सरदार सरोवर बांध को राष्ट्र को समर्पित किया। 138.68 मीटर की अपनी पूर्ण ऊंचाई वाले इस बांध से ‘गुजरात की जीवनरेखा’ कही जाने वाली नर्मदा अब लाखों हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है। इसके बाद मां नर्मदा का जल कच्छ के रेगिस्तानी सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचता है।
कांग्रेस की नीति-लटकाना, अटकाना और भटकाना: मोदी
पीएम मोदी ने कहा-जा योजना 900 करोड़ में पूरी होनी थी, कांग्रेस की लेटलतीफी के कारण उसकी लागत 90 हजार करोड़ तक पहुंच गई। पीएम मोदी ने कांग्रेस की कार्यशैली को ‘लटकाना, अटकाना और भटकाना’ वाला बताया। उन्होंने सरदार सरोवर बांध, कश्मीर रेलवे प्रोजेक्ट और बोगीबील पुल का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस के पास योजनाओं को लागू करने की नीयत ही नहीं थी।













