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  • SC ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक, लेकिन सरकार ने क्या किया? जानें ‘झूठी शिकायतों’ वाले क्लॉज का क्या होगा

    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भले ही यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी हो लेकिन ये मामला शांत नहीं हुआ है। सवर्ण समुदाय के लोग इस पूरे मामले में केंद्र की मोदी सरकार का रुख जानना चाहते हैं। इस बीच खबर है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को 2025 के ड्राफ्ट में


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    By Azad Hind Desk जनवरी 31, 2026
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    नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने भले ही यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी हो लेकिन ये मामला शांत नहीं हुआ है। सवर्ण समुदाय के लोग इस पूरे मामले में केंद्र की मोदी सरकार का रुख जानना चाहते हैं। इस बीच खबर है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को 2025 के ड्राफ्ट में शामिल ‘झूठी शिकायतों’ वाले क्लॉज को हटाने पर विचार करना शुरू कर दिया है। यह क्लॉज फाइनल नियमों से हटा दिया गया था।

    यूजीसी पर किस बात को लेकर है विरोध?

    सवर्ण जातियों के लोगों का कहना है कि अगर झूठी शिकायतों के खिलाफ कोई सजा नहीं होगी, तो उन्हें परेशान करने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है। नियमों के खिलाफ विरोध कर रहे लोगों ने यह भी कहा है कि नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को शामिल किया गया है, जो 2012 के नियमों में नहीं था। इससे आम वर्ग को उनके साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ कोई समाधान नहीं मिलेगा। हालांकि, OBC को नियमों के दायरे से बाहर करना आसान नहीं होगा।

    UGC के नए नियमों में क्या बदलाव कर सकती है सरकार?

    सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह देख रही है कि क्या झूठी शिकायतों के खिलाफ सुरक्षा उपायों को फिर से जोड़ा जाना चाहिए और भेदभाव-विरोधी तंत्र का दायरा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को भी शामिल करने के लिए बढ़ाया जाना चाहिए।

    यूजीसी पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

    • सुप्रीम कोर्ट ने बीते गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई थी और कहा था कि ये सामाजिक विभाजन को बढ़ावा दे सकते हैं और जाति-विहीन समाज के लक्ष्य पर खतरनाक असर डाल सकते हैं।
    • नियमों की धारा 2 और 3(c) में लाभार्थियों को ‘सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग’ के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें यह भी कहा गया है कि ‘जाति-आधारित भेदभाव’ का मतलब अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और OBC के सदस्यों के खिलाफ भेदभाव है। खास बात यह है कि OBC का उल्लेख ड्राफ्ट के नियम 3(c) में नहीं था, लेकिन इस साल के फाइनल नियमों में इसे जोड़ा गया।
    • ड्राफ्ट नियमों में झूठी शिकायतें करने वालों के लिए दंड का प्रावधान था। हटाए गए प्रावधान में कहा गया था कि अगर कोई झूठी भेदभाव की शिकायत करता है, तो उसे समानता समिति की ओर से तय जुर्माना भरना पड़ सकता है। बार-बार या गंभीर उल्लंघन के मामले में, संस्थागत नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती थी।
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