Cryptocurrency Price: ₹7000000000000 स्वाहा… बिटकॉइन 5% तो पाई नेटवर्क 7% गिरा, क्रिप्टो बाजार में बड़ी हलचल
बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण
1. आईटी शेयरों में भारी बिकवाली का नया झटका
मंगलवार को टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस (Infosys) और एचसीएल टेक्नोलॉजीज (HCL Technologies) जैसी बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली हुई। इसकी वजह यह थी कि एंथ्रोपिक (Anthropic) कंपनी ने कहा कि उनका क्लाउड कोड (Claude Code) टूल पुराने COBOL सिस्टम को आधुनिक बनाने में मदद कर सकता है। COBOL एक पुरानी प्रोग्रामिंग भाषा है जो आज भी कई जरूरी सिस्टम में इस्तेमाल होती है।
2. ट्रंप की नई टैरिफ की धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार को लेकर रुख की चिंता ने बाजार में बिकवाली को और बढ़ा दिया। ट्रंप ने सोमवार को ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट किया कि जो भी देश हालिया अदालती फैसले के साथ ‘खेल’ खेलने की कोशिश करेगा, उसे बहुत ज्यादा टैरिफ का सामना करना पड़ेगा। उनके ये बयान तब आए जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ‘टैरिफ को रद्द कर दिया था। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि वे अब ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 के सेक्शन 122 के तहत 15% का ग्लोबल टैरिफ लगाएंगे।
3. अमेरिकी और एशियाई बाजार में गिरावट
मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों में भी गिरावट देखी गई। वॉल स्ट्रीट पर रात भर हुई बिकवाली ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया था। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ती भू-राजनीतिक तनावों ने बाज़ार की चाल को और धीमा कर दिया। MSCI एशिया-पैसेफिक एक्स जापान इंडेक्स छह दिनों की तेजी के बाद 0.2% गिर गया। अमेरिका में रात भर के कारोबार में S&P 500 इंडेक्स 1.0% गिर गया। नैस्डैक कंपोजिट ने भी 1.1% का गोता लगाया।
4. साप्ताहिक एक्सपायरी ने बढ़ाई बेचैनी
यह गिरावट निफ्टी 50 डेरिवेटिव्स की साप्ताहिक एक्सपायरी के साथ आई है। यह वो समय होता है जब ट्रेडर्स आमतौर पर अपनी पोजीशन को स्क्वायर ऑफ (square off) करते हैं या रोल ओवर (roll over) करते हैं। जब बड़े ऑप्शन्स की पोजीशन एडजस्ट की जाती है, तो अंडरलाइंग इंडेक्स (underlying index) में सामान्य से ज्यादा बड़ी हलचल देखी जा सकती है। लॉन्ग पोजीशन (long positions) को खत्म करने और नई हेजिंग (hedging) एक्टिविटी से बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
5. कमजोर रुपया बनाम डॉलर
मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.07% गिरकर 90.95 पर आ गया। रुपये का गिरना विदेशी पूंजी के बाहर जाने का कारण बन सकता है, जिससे इक्विटी यानी शेयर बाजार पर दबाव पड़ा सकता है। कमजोर रुपया आयात की लागत को भी बढ़ा देता है, खासकर कच्चे तेल की। यह कंपनियों की कमाई की उम्मीदों को कम कर सकता है और बाजार के सेंटिमेंट को खराब कर सकता है।














