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  • Shattila Ekadashi 2026 : षटतिला एकादशी व्रत कब है? जानें सही तारीख, महत्व और पूजा विधि

    माघ मास में आने वाली एकादशी का नाम षटतिला एकादशी होता है। षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु की तिल से पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति षटतिला एकादशी का व्रत रखता है उसके जीवन में सुख और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन किए गए दान पुण्य का भी व्यक्ति


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    By Azad Hind Desk जनवरी 8, 2026
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    माघ मास में आने वाली एकादशी का नाम षटतिला एकादशी होता है। षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु की तिल से पूजा की जाती है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति षटतिला एकादशी का व्रत रखता है उसके जीवन में सुख और पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन किए गए दान पुण्य का भी व्यक्ति को दोगुना लाभ मिलता है। इस बार षटतिला एकादशी पर बहुत ही शुभ योग बन रहा है। आइए जानते हैं षटतिला एकादशी का व्रत कब है साथ ही जाने महत्व और पूजा विधि।

    कब है षटतिला एकादशी 2026 ?

    वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, एकादशी तिथि का आरंभ 13 जनवरी मंगलवार को दोपहर में 3 बजकर 18 मिनट पर होगा और 14 फरवरी को शाम में 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदय तिथि के अनुसार, एकादशी का व्रत 14 फरवरी के दिन ही रखा जाएगा। इस बार षटतिला एकादशी के साथ मकर संक्रांति का शुभ संयोग भी बन रहा है। षटतिला एकादशी पर इस बार सर्वार्थ सिद्धि के साथ साथ अमृत सिद्धि योग बन रहा है।

    षटतिला एकादशी का महत्व

    ऐसी मान्यता है कि षटतिला एकादशी का व्रत करने वालों को पाप से मुक्ति मिलती है। साथ ही जीवन में सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है और इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से भी पुण्य फल की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल का दान और तिल से जुड़े उपाय करना का दोगुना लाभ मिलता है।

    षटतिला एकादशी पूजा विधि

    1) षटतिला एकादशी के मौके पर सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

    2) इसके बाद पीले रंग का वस्त्र चौकी पर बिछाएं और भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

    3) पूजा में तिल से बने व्यंजन का इस्तेमाल करें। भगवान विष्णु को तिल के लड्डुओं को भोग लगाएं और प्रसाद के रुप में सभी को दें।

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