सवाल: हाल ही में BNP अध्यक्ष बने तारिक रहमान की बांग्लादेश वापसी को कैसे देखती हैं?
जवाब: बांग्लादेश के लोगों को ये याद रखना चाहिए कि तारिक रहमान लंदन में निर्वासित तौर पर कई साल तक रहे। वह आम लोगों की रोज की परेशानियों से कोसों दूर थे। देश से वह भागे, क्योंकि उन्होंने अपनी स्वर्गीय मां और पूर्व पीएम खालिदा जिया की पब्लिक फंड गबन करने में मदद की थी। उनकी उसमें भूमिका थी। ये राजनीतिक असहमति का मसला नहीं, जवाबदेही का है। BNP लीडरशिप ने अपने हितों की वजह से कट्टरपंथी तत्वों के साथ करीबी दिखाई है। लोकतांत्रिक विकल्प के बजाय BNP ने बहिष्करण, डराना धमकाना और अवसरवादिता को चुना। बांग्लादेश को ऐसी सरकार चाहिए जो देश के भीतर से आए, विविधता का सम्मान करे और लोगें के प्रति जवाबदेह हो। ऐसी नहीं, जो बाहर रहकर कट्टरपंथी ताकतों से मिल कर सत्ता की जुगत में लगे।
सवाल: फरवरी में होने वाले चुनाव की संभावनाओं पर सवाल उठ रहे आपकी पार्टी की भागीदारी पर भी प्रश्न है?
जवाब: सवाल ये नहीं है कि चुनाव होंगे कि नहीं, सवाल ये है कि क्या ये वैध तरीके से होंगे। लोकतांत्रिक विकल्पों से विहीन चुनाव केवल नाम का चुनाव होता है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार को लोगों ने नहीं चुना है। इसने खुद को देश का संविधान फिर से लिखने और कानून में संशोधन कर देश के सबसे लोकप्रिय दल को चुनाव में हिस्सा लेने से वंचित के लिए नियुक्त किया है। अगर अवामी लीग को चुनाव लड़ने दिया जाए तो देश के आधे से ज्यादातर वोटर हमारे पक्ष में वोट करेंगे। इसी डर की वजह से उन्होंने हमें बैन किया है। एक बिना चुनी सरकार के प्रमुख को अवामी लीग को बैन करने का क्या हक है ? जबकि हमारे दल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से 9 बार चुनकर सरकार में भेजा है। अभी राजनीतिक उत्पीड़न के चलते वैध राजनीतिक दलों ने कदम पीछे कर लिए हैं, जमात और BNP की मंजूरी के बिना नामांकन पत्र खरीदने वालों को पुलिस अरेस्ट कर रही है।
सवाल: अल्पसंख्यकों पर हमलों के पीछे भारत ने कहा कि इन सबके पीछे एक पैटर्न है, आप क्या कहेंगी?
जवाब: एक सरकार की मूल जिम्मेदारी अपने नागरिकों को बचाना है। अंतरिम सरकार ना सिर्फ इस उद्देश्य में नाकाम रही है, बल्कि इस दमन को सक्रिय तौर पर शह दे रही है। मेरी सरकार के दौरान जिन कट्टरपंथी समूहों को काबू करने में इतनी मेहनत करनी पड़ी थी, वे अब ताकतवर और प्रभुत्वशाली हो गए हैं। उनमें से कई अपराधी, आतंकी संगठनों से संबंध रखते हैं। उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने की इजाजत दी गई है। बांग्लादेश में मौजूदा महौल कट्टरपंथी ताकतों के प्रति तुष्टिकरण का नतीजा है।
सवाल: भारत बांग्लादेश में शांति कायम करने में किस तरह मददगार साबित हो सकता है?
जवाब: भारत के लोगों से मिले समर्थन को लेकर मैं शुक्रगुजार हूं। भारत सरकार ने यूनुस प्रशासन में आम हो चुकी मानवाधिकार हनन की घटनाएं और राजनीतिक दमन की साफ तौर पर आलोचना की है। अल्पसंख्यक समुदायों को रोज हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। ढाका से असहज बयानबाजी हो रही है। ऐसे में भारत सरकार ये जानती है कि दोनों देशों की समृद्धि आपस में जुड़ी हुई है। उम्मीद है जैसे ही वहां लोकतांत्रिक शासन तो दोनों महान देश फिर एकसाथ काम करेंगे।
सवाल: आपके बच्चों को अब फ्रंटलाइन पॉलिटिक्स में आना चाहिए क्या?
जवाब: अवामी लीग किसी एक परिवार की कभी नहीं रही। ये लाखों बांग्लादेशी लोगों की पार्टी है, जे लोकतंत्र, आजादी और सहिष्णुता में विश्वास रखते हैं। ये लोग 1971 के मूल्यों के बारे में विश्वास करते रहे हैं। हमारी सरकार ने लाखों को गरीबी से निकाला है। महिलाओं का सशक्तिकरण किया। ऐसी इकॉनमी सामने रखी जो 7% की रफ्तार से बढ़ी है। सभी समुदाय के लोगों के लिए शांतिपूर्ण माहौल कायम किया। ये सबकुछ हमारे दल कार्यकर्ता और बांग्लादेश के लोगों से जुड़ा है। जनता ने 9 बार हम पर विश्वास किया। हम भविष्य में भी उनकी सेवा, सत्ता और विपक्ष दोनों में करने के लिए तैयार है। एक सरकार की मूल जिम्मेदारी अपने नागरिकों को बचाना है। अंतरिम सरकार ना सिर्फ इस उद्देश्य में नाकाम रही है, बल्कि इस दमन को सक्रिय तौर पर शह दे रही है।
सवाल: द्विपक्षीय संबंधों का भविष्य कहां देखती हैं आप?
जवाब: भारत बांग्लादेश का सबसे नजदीकी दोस्त और लंबे समय का साझेदार रहा है। यूनुस प्रशासन की ओर से अल्पसंख्यकों के ऊपर खुलेआम निशाना साधने की छूट देने की वजह से इस संबंध को खासा नुकसान पहुंचा है। भारतीय मिशनों की घेराबंदी और राजनयिक प्रतिनिधियों को धमकाने की छूट दी गई, ये उस प्रशासन के तहत हो रहा है, जिसके पास ना तो अनुभव है। और ना ही बांग्लादेश की विदेश नीति के संचालन का जनादेश भारत को एक विश्वसनीय साझेदार की जरूरत है। भारत का धैर्य तारीफ के लायक है।
सवाल: हसीना का पहली बार सार्वजनिक संबोधन
जवाब: बांग्लादेश छोड़ने के बाद पहली बार शेख हसीना ने ऑडियो के जरिए यूनुस सरकार पर हमला बेला। उन्होंने कहा कि इस सरकार के नेतृत्व में निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते हैं। यूनुस प्रशासन में महिलाओं और अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न हो रहा है। कानून-व्यवस्था डांवाडोल है। हसीना ने इसे रोकने और पिछले साल की घटनाओं की यूएन से जांच कराने की मांग की। AFP के मुताबिक, हसीना के सार्वजनिक संबोधन के बाद भारत और बांग्लादेश रिश्तों में खटास बढ़ सकती है।













