इसका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो एक नंबर कई डिवाइस पर चलाते हैं या फिर वेब वर्जन का इस्तेमाल करते हैं। वहीं सरकार का कहना है कि सिम बाइंडिंग से साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी। गौर करने वाली बात है कि सिम बाइंडिंग के नियम के मुताबिक जिस नंबर से मैसेजिंग ऐप्स को चालाता जा रहा हो, उसका सिम फोन में होना जरूरी है और इन मैसेजिंग ऐप्स के वेब वर्जन हर 6 घंटे में लॉग-आउट हो जाएंगे।
आम यूजर्स की बढ़ेगी परेशानी
CUTS International ने अपनी स्टडी में 4,200 लोगों को शामिल किया गया, जिसमें पाया गया कि लगभग 86% लोग अपने परिवार के साथ फोन या सिम शेयर करते हैं। ऐसे में अब सिम बाइंडिंग की वजह से मुख्य सिम धारक अगर पास में नहीं है, तो परिवार के बाकी सदस्यों को OTP और ऑथेंटिकेशन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
इसका सबसे ज्यादा नुकसान कम आय वाले परिवारों को होगा, जहां एक ही फोन से पूरा घर डिजिटल सेवाएं लेता है। इसके साथ ही बार-बार लॉग-आउट होने और दोबारा वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से रोजमर्रा के डिजिटल कामों में देरी और रुकावट आना भी तय है।
छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा बड़ा असर
रिपोर्ट्स के अनुसार,(REF.) छोटे कारोबारियों के लिए मैसेजिंग ऐप्स सिर्फ बातचीत नहीं बल्कि कमाई का भी जरिया है। इसके मुताबिक 58% कारोबारी वेब इंटरफेस का इस्तेमाल करते हैं और 65% कर्मचारी अकाउंट शेयर करके अपने कस्टमर्स तक पहुंचते हैं। सिम बाइंडिंग के नए नियम के तहत वेब सेशन हर 6 घंटे में अपने आप लॉग-आउट हो जाएगा। इससे ई-कॉमर्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वालों का वर्कफ्लो बिगड़ सकता है। इससे न सिर्फ काम रुकेगा बल्कि कंपनियों की लागत बढ़ेगी और काम में देरी भी आएगी।
टस से मस नहीं सरकार
सिम बाइंडिंग के नियम को लेकर सरकार का रुख साफ है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने साफ कर दिया है कि 6 घंटे के अनिवार्य लॉग-आउट नियम में कोई ढील नहीं दी जाएगी। सरकार का मत है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर खतरों से निपटना किसी भी राजस्व या सुविधा से ज्यादा जरूरी है। वहीं एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इन नियमों को लागू करने से पहले इसके तकनीकी और आर्थिक प्रभावों का आंकलन किया जाना चाहिए।














