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  • Su-57 भारत में बन सकता है ज्यादा घातक,रूसी स्टील्थ पर अमेरिकी मिलिट्री एक्सपर्ट का बड़ा दावा

    नई दिल्ली: भारत, फ्रांस से अतिरिक्त 114 राफेल मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने की तैयारी में है और इसी दौरान रूस से स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 मंगवाने की भी चर्चा खबरों में छायी हुई है। क्योंकि, भारतीय वायु सेना को स्टील्थ फाइटर जेट की बहुत ही ज्यादा जरूरत है और उसके सामने रूसी Su-57 एक


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    By Azad Hind Desk फरवरी 27, 2026
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    नई दिल्ली: भारत, फ्रांस से अतिरिक्त 114 राफेल मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट खरीदने की तैयारी में है और इसी दौरान रूस से स्टील्थ फाइटर जेट Su-57 मंगवाने की भी चर्चा खबरों में छायी हुई है। क्योंकि, भारतीय वायु सेना को स्टील्थ फाइटर जेट की बहुत ही ज्यादा जरूरत है और उसके सामने रूसी Su-57 एक सुविधाजनक विकल्प लग रहा है। एक अमेरिकी मिलिट्री एक्सपर्ट ने दावा किया है कि भारतीय टेक्नोलॉजी से यह फाइटर जेट और भी ज्यादा घातक साबित हो सकता है।

    भारतीय टेक्नोलॉजी आ सकती है Su-57 के काम

    एक अमेरिकी रक्षा विश्लेषक ने अपने विश्लेषण में पाया है कि भारत के पास ऐसी तकनीकी क्षमता है कि वह रूसी Su-57 फाइटर जेट को मौजूदा रूप के मुकाबले काफी ज्यादा अपग्रेड कर सकता है। हालांकि डिफेंस डॉट इन की एक रिपोर्ट के अनुसार पूर्व अमेरिकी सैनिक वेस ओ डोन्नेल ने इसकी स्टील्थ टेक्नोलॉजी को लेकर अभी भी सवाल खड़े किए हैं।

    स्वदेशी सेंसर और सॉफ्टवेटर से बढ़ेगी ताकत

    अमेरिकी एक्सपर्ट का कहना है कि भारत अपने स्वदेशी सेंसर और सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से इस रूसी प्लेटफॉर्म को अपग्रेडेड लॉन्ग रेंज स्ट्राइक प्लेटफॉर्म में बदल सकता है, चाहे इसका मौलिक डिजाइन पूर्ण रूप से ‘स्टील्थ’ स्तर हासिल करने में भले ही बाधक हो। दरअसल,इसकी स्टील्थ क्षमता की कथित कमियों की वजह से अक्सर इसे आलोचनाओं का शिकार होना पड़ता है।

    Su-57 की स्टील्थ क्षमता पर क्यों उठते हैं सवाल

    स्टील्थ टेक्नोलॉजी की वजह से फाइटर जेट दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आ पाता है। लेकिन, अमेरिकी विश्लेषक के अनुसार Su-57 का इंजन, इसके रडार की स्टील्थ क्षमता कमजोर है और इंफ्रारेड सिग्नल को लेकर भी यह पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार इसी वजह से यूक्रेन युद्ध में यह दूर से ही मिसाइल हमले करता है, न कि उसके एयर स्पेस के नजदीक जाने की कोशिश करता है।

    Su-57 कैसे बन सकता है ज्यादा घातक

    लेकिन, अमेरिकी एक्सपर्ट ने कहा है कि रूसी उपकरणों के बदले भारत अपनी स्वदेशी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके इसकी कमियां दूर कर सकता है और इसे अभी के मुकाबले कहीं ज्यादा घातक बना सकता है। उन्होंने भारत के लिए कुछ सलाह दिए हैं, जिससे इसकी ताकत में बढ़ोतरी हो सकती है-

    • डीआरडीओ द्वारा विकसित उत्तम AESA रडार फिट किया जा सकता है।
    • मिशन सॉफ्टवेयर को स्ट्रीमलाइन करके पायलट का काम आसान किया जा सता है और उस तक स्पष्ट कॉम्बैट डेटा पहुंचाया जा सकता है।
    • इलेक्ट्रोनिक वॉरफेयर सिस्टम को अपग्रेड करके मॉडर्न जैमिंग तकनीक की चपेट में आने से छुटकारा पाया जा सकता है।
    • भारत के पास Su-30MKI का उदाहरण सामने है, जिसमें रूसी एयरफ्रेम में भारतीय, फ्रेंच और इजरायली एवियोनिक्स लगाकर इसे अपने लिए कारगर हथियार बनाया जा चुका है।

    Su-57 फाइटर जेट क्या है

    सुखोई Su-57 रूस में बना पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट है। नाटो इस लड़ाकू विमान को ‘फेलन'(आततायी) कहता है। रूस ने इस फाइटर जेट को स्टील्थ की खासियत के साथ हाई मैनूवरेबिलिटी और लंबी दूरी तक हमला करने के लिए डिजाइन किया है।

    Su-57 फाइटर जेट से बेहतर कौन

    Su-57 की डिजाइन अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान F-35 और चीन के J-20 के मुकाबले तैयार की गई है। संडे गार्डियन की एक रिपोर्ट के अनुसार रूस ने इसका सीमित तौर पर इस्तेमाल किया है और अभी भी इसके सिस्टम और इंजन को अपग्रेड किए जा रहे हैं।

    इसमें AL-41F1 का इस्तेमाल होता है और इसे ज्यादा एडवांस इज्देलिए 30 इंजन से बदलने की योजना है, जिससे इसका थर्स्ट बढ़ेगा और ईंधन की खपत में भी कमी आएगी। भारतीय वायु सेना के लिए रूस से 36 से 40 सुखोई Su-57 फाइटर जेट खरीदे जाने की चर्चा है।

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