सूर्य गायत्री मंत्र का करें जाप
‘ओम भास्कराय विद्महे, महातेजाय धीमहि, तन्नो सूर्य प्रचोदयात्’ सूर्य ग्रहण की अवधि के दौरान सूर्य गायत्री मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। ग्रहण के दौरान इस मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। साथ ही, कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत हो सकती है और मानसिक शांति मिलती है।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें
‘ओम त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।’ सूर्य ग्रहण के दौरान इस मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है जिसका जाप करने से राहु केतु के बुरे प्रभाव से बचाव हो सकता है। साथ ही, भगवान शिव की कृपा से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति बनी रहती है।
सूर्य बीज मंत्र का जाप करें
‘ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः’ सूर्य बीज मंत्र का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करना चाहिए। इसके लिए सूर्य ग्रहण के दौरान किसी शांत स्थान पर बैठकर श्रद्धापूर्वक इसका जप करें। ऐसा करने से जातक के आत्मविश्वास में वृद्धि हो सकती है और जीवन में उन्नति के नए मार्ग खुल सकते हैं। साथ ही, जातक को सूर्यदेव की कृपा प्राप्त हो सकती है।
राहु केतु के मंत्रों का जाप करें
मान्यता है की राहु और केतु छाया ग्रह हैं जो जो ग्रहण काल के दौरान सूर्य और चंद्रमा को ग्रसित करते हैं। ऐसे में इस ग्रहण की अवधि के दौरान राहु और केतु के मंत्रों का जाप करना प्रभावशाली माना जाता है। ऐसा करने से इनके प्रतिकूल प्रभाव को कम व बचाव किया जा सकता है। सूर्य ग्रहण के समय आप राहु के ‘ओम रां राहवे नमः’ और केतु के ‘ओम कें केतवे नमः’ मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं।
भगवान विष्णु के इस मंत्र का करें जाप
‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का कम से कम 108 बार जाप अवश्य करना चाहिए। सूर्य ग्रहण के दौरान श्रद्धा भाव से इस मंत्र का जाप करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है क्योंकि, माना जाता है की इस अवधि के दौरान मानसिक तौर पर पूजा व ध्यान करने का प्रभाव अन्य दिनों की तुलना में अधिक होता है। ऐसे में मंत्रों के जाप से जातक को कई गुना फल प्राप्त हो सकता है। इसके साथ ही, गुरु के मंत्रों का जाप भी बेहद उत्तम माना जाता है। ऐसे में सूर्य ग्रहण के दौरान गुरु मंत्र का भी जाप अवश्य करें।













