बांग्लादेश के साथ नई ट्रेड डील में अमेरिका ने यह भी वादा किया है कि बांग्लादेश से अमेरिका आने वाले कुछ खास टेक्सटाइल और कपड़ों के शिपमेंट पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। यानी उन पर ‘जीरो’ टैरिफ होगा। हालांकि यह जीरो टैरिफ उन्हीं टेक्सटाइल और कपड़ों के शिपमेंट पर होगा जो अमेरिकी कपास और सिंथेटिक फाइबर से बने होंगे। इस पर बांग्लादेश के मुख्य वार्ताकार और एनएसए रहमान ने कहा, ‘अमेरिकी इनपुट से बने खास टेक्सटाइल और कपड़ों के निर्यात पर ‘जीरो’ टैरिफ लगने से हमारे गारमेंट सेक्टर को बहुत बड़ी मजबूती मिलेगी।’
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बांग्लादेश को क्या होगा फायदा?
- टैरिफ कम होने से बांग्लादेश के निर्यातकों को राहत मिलेगी और वे अमेरिका में अपने उत्पाद आसानी से बेच पाएंगे।
- अमेरिकी कपास और फाइबर का इस्तेमाल करने वाले बांग्लादेशी कपड़ों पर जीरो टैरिफ लगने से वहां के गारमेंट उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
ट्रंप ने क्या खेल कर दिया?
बांग्लादेश के साथ ट्रेड डील कर डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा खेल कर दिया है। इस डील ने भारत को झटका दिया है। अमेरिका ने जहां अमेरिकी कपास और फाइबर वाले बांग्लादेशी कपड़ों पर टैरिफ जीरो कर दिया है तो वहीं भारत में यह 18 फीसदी है। यानी बांग्लादेश के कपड़ा निर्यातकों को अमेरिका में कपड़े बेचने के लिए कोई टैक्स नहीं देना होगा। इससे बांग्लादेश के कपड़े अमेरिका में भारतीय कपड़ों के मुकाबले सस्ते मिलेंगे। ऐसे में अमेरिकी कंपनियां बांग्लादेश से कपड़े खरीदना पसंद करेंगी, ना कि भारत से।
यह तब है जब भारत अमेरिका से 200 मिलियन डॉलर की कपास खरीदता है और बांग्लादेश 250 मिलियन डॉलर की। यानी 50 मिलियन डॉलर के अंतर के बावजूद भारत को 18% ज्यादा टैक्स का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बांग्लादेश पर मौजूदा डील से पहले 20 फीसदी टैक्स लगता था। अब नई डील के तहत बांग्लादेश को कपड़ों को ड्यूटी-फ्री यानी बिना टैक्स के सामान बेचने की सुविधा मिल गई है। इससे भारत का पुराना टैक्स वाला फायदा खत्म हो गया है और बांग्लादेश के मुकाबले भारतीय कपड़ा इंडस्ट्री को नुकसान होगा।
यहां भी धोखा दे गए ट्रंप!
बांग्लादेश के साथ डील कर ट्रंप ने भारत को कई तरह से धोखा दिया है। हाल में भारत के साथ डील में ट्रंप ने शर्त रखी है कि अगले कुछ सालों में भारत को अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदना होगा। वहीं बांग्लादेश के साथ डील में इस तरह की कोई शर्त नहीं रखी गई है। ऐसे में देखा जाए तो भारत को टैरिफ में ढील देने के बाद भी 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने की शर्त भारत पर एक बड़ा बोझ है।













