विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से ग्लोबल इकनॉमी को फौरी तौर पर राहत जरूर मिलेगी। हालांकि, कुछ का कहना है कि इससे वातावरण और अराजक हो सकता है।
फैसला आते ही लगाया 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ
रायटर्स एजेंसी की एक स्टोरी के अनुसार, विशेषज्ञ यह चिंता जता रहे हैं कि ट्रंप इस फैसले के खिलाफ कुछ और भी तरीके अपना सकते हैं, जिससे वैश्विक माहौल और भी ज्यादा अनिश्चतताओं से घिर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के कुछ समय बाद ही ट्रंप ने नए नियमों के तहत 150 दिनों की अवधि के लिए 10 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लगा दिया है।
दुनिया का कारोबार अनिश्चिततापूर्ण हो जाएगा: एनालिस्ट
यूरोपियन पॉलिसी सेंटर थिंक टैंक के एनालिस्ट वर्ग फॉकमैन कहते हैं-आमतौर पर मेरा मानना है कि पूरी दुनिया के कारोबार में आने वाला समय और ज्यादा अनिश्चिततापूर्ण हो जाएगा। हर कोई अमेरिकी टैरिफ के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन करेगा। आखिर में सब पहले जैसा ही दिखेगा।
फैसला चाहे जैसा हो, टैरिफ कायम रहेगा: इकनॉमिस्ट्स
मीडिया रिपोर्ट्स में ING बैंक में इकनॉमिस्ट्स इस बात पर सहमत हैं कि भले ही मचान हटा दिया गया है, लेकिन इमारत का निर्माण कार्य अभी भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसले के चाहे जो भी मायने हों, टैरिफ लागू रहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट का शुक्रवार का फैसला केवल ट्रंप द्वारा नेशनल इमरजेंसी हालात के लिए बनाए गए अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के आधार पर लागू किए गए टैरिफ से संबंधित है। अनुमान है कि अब तक इनसे 175 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि मिली है।
भारत-चीन पर ज्यादा नाटकीय बदलाव
व्यापार नीति पर नजर रखने वाली संस्था ग्लोबल ट्रेड अलर्ट के अनुमान के अनुसार, इस फैसले से अकेले ही व्यापार पर बोझ बढ़ाने वाला औसत अमेरिकी टैरिफ लगभग आधा होकर 15.4% से 8.3% हो जाएगा।
भारत-चीन, ब्राजील समेत जिन देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाए गए हैं, वहां ज्यादा नाटकीय बदलाव देखने को मिलेगा। इसका मतलब यह होगा कि डबल डिजिट में प्रतिशत अंकों की कटौती। हालांकि, यह कटौती अभी भी उच्च स्तर पर रहेगी। अभी भारत पर 18 फीसदी टैरिफ है।
द्विपक्षीय डील पर कोई असर नहीं पड़ने वाला
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के नए फैसले से द्विपक्षीय ट्रेड डील पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उसकी यथास्थिति कायम रहेगी। ट्रंप प्रशासन ने फैसले से काफी पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि वह टैरिफ फिर से लागू करने के लिए अन्य कानूनी उपायों का इस्तेमाल कर सकता है और करेगा।
करीब दो दर्जन ऐसे देश जिन्होंने अमेरिका के साथ टैरिफ तय करने और कुछ मामलों में अमेरिका में निवेश करने के लिए द्विपक्षीय समझौते किए थे। अब यह आकलन करेंगे कि क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला उन्हें पुनर्विचार करने का अवसर देता है। हालांकि, ब्रिटेन तो ट्रंप के 10 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी थी।
ट्रंप के टैरिफ की अराजकता का चीन ने निकाला तोड़
EPC के फोकमैन ने ट्रंप के तथाकथित पारस्परिक टैरिफ के कारण पैदा हुई अराजकता के बारे में कहा कि चीन ने 2025 में लगभग 1.2 ट्रिलियन डॉलर का रिकॉर्ड व्यापार अधिशेष दर्ज किया, जिसका मुख्य कारण गैर अमेरिकी बाजारों में निर्यात में आई तेजी थी।
चीन के उत्पादकों ने ट्रंप के आक्रामक रवैये के मुताबिक खुद को ढाल लिया था। ऐसे में कुछ देश अमेरिका के साथ अपने मौजूदा द्विपक्षीय समझौतों पर कायम रहना पसंद कर सकते हैं।
यूरोप से समझौता टूट सकता है क्या
वहीं, आर्थिक थिंक टैंक ब्रुगेल के शोधकर्ता निकलास पोइटियर्स ने कहा कि यूरोपीय संघ-अमेरिका व्यापार समझौते पर कई राजनीतिक प्रश्नचिह्न हैं, जिसमें यूरोप को पीछे हटते हुए और नुकसान उठाते हुए देखा गया है। उन्होंने कहा-ऐसी परिस्थितियां हो सकती हैं जिनमें यह समझौता टूट जाए।













