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  • Turkey Pakistan News: तुर्की और पाकिस्तान खाड़ी देशों की ताकत को कैसे कमजोर कर रहे, मौके का ऐसे उठा रहे फायदा

    दुबई: फूट डालो और राज करो। तुर्की और पाकिस्तान मध्य पूर्व में कुछ ऐसी ही रणनीति पर चल रहे हैं। ये दोनों देश मध्य पूर्व में जारी क्षेत्रीय टकराव का फायदा उठा रहे हैं। इसके जरिए दोनों देशों ने मध्य पूर्व में अपने दबदबे को बढ़ाया है। पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता


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    By Azad Hind Desk जनवरी 27, 2026
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    दुबई: फूट डालो और राज करो। तुर्की और पाकिस्तान मध्य पूर्व में कुछ ऐसी ही रणनीति पर चल रहे हैं। ये दोनों देश मध्य पूर्व में जारी क्षेत्रीय टकराव का फायदा उठा रहे हैं। इसके जरिए दोनों देशों ने मध्य पूर्व में अपने दबदबे को बढ़ाया है। पाकिस्तान का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता इसी का एक उदाहरण है। तुर्की ने भी सऊदी अरब के साथ कई बड़े रक्षा संबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। तुर्की संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर भी डोरे डाल रहा है। पाकिस्तान भी इस कोशिश में शामिल है। दोनों देशों की कोशिश मध्य पूर्व में अशांति को बढ़ावा देकर मौके का फायदा उठाने की है।

    खाड़ी देशों में तनाव का फायदा उठा रहा पाकिस्तान

    पाकिस्तान खाड़ी देशों में जारी तनाव का फायदा उठाने की पूरी कोशिश कर रहा है। वह न सिर्फ कूटनीतिक बातचीत में शामिल होना चाहता है, बल्कि संघर्ष में शामिल देशों को हथियारों का भी ऑफर दे रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने सऊदी अरब को कर्ज के बदले जेएफ-17 लड़ाकू विमान का ऑफर दिया था। पाकिस्तानी नेतृत्व सऊदी के साथ रक्षा समझौता होने के बाद अब संयुक्त अरब अमीरात पर भी डोरे डाल रहा है। लगातार पाकिस्तानी शीर्ष राजनेता और अधिकारी यूएई का दौरा कर रहे हैं।

    तुर्की ने मध्य पूर्व में में किया बड़ा खेल

    CNN-News18 की रिपोर्ट में टॉप इंटेलिजेंस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि तुर्की सऊदी अरब और यूएई से सीधे टकराव के बजाए क्षेत्रीय कमजोरियों का फायदा उठाकर खाड़ी देशों में अपने दबदबे को बढ़ा रहा है। तुर्की इसके लिए पाकिस्तान से सहयोग भी ले रहा है। रिपोर्ट में इंटेलिजेंस के हवाले से बताया गया है कि तुर्की को बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य के आसपास लंबे समय से चली आ रही अस्थिरता से चुपचाप फायदा हुआ है।

    बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य कितना महत्वपूर्ण

    बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य एक महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है, जिससे अनुमानित 12-15 प्रतिशत वैश्विक व्यापार और यूरोप जाने वाले लगभग 30 प्रतिशत कंटेनर ट्रैफिक गुजरता है। इस गलियारे में किसी भी रुकावट से सऊदी और अमीराती बंदरगाहों पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। खासकर जेबेल अली और फुजैराह जैसे बंदरगाहों के पूरी तरह ठप होने का खतरा है।

    सऊदी-यूएई को कमजोर कर रहा तुर्की

    तुर्की यमन में हूती विद्रोहियों का समर्थन नहीं करता है। इसके बजाए वह मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े यमनी गुटों के संपर्क में है। इससे वह सऊदी अरब समर्थित राजनीतिक ढांचों को कमजोर कर रहा है। तुर्की ने ऐसी ही रणनीति लीबिया और सूडान में आजमायी थी, जहां उसने अपने सैनिकों को तैनात किए बिना सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के प्रभाव को कम करने के लिए राजनीतिक इस्लामी समूहों का समर्थन किया था।

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