द इकनॉमिक टाइम्स पर छपी एक खबर के अनुसार, कजाकिस्तान की सरकारी यूरेनियम कंपनी ‘कजाटोमप्रोम’ ने भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ हाल ही में हुई बातचीत के बाद शुक्रवार को यह ऐलान किया।
यूरेनियम के लिए हो गया नया करार
- भारत और कजाकिस्तान के बीच पिछला करार खत्म हो गया था। उसके कुछ साल बाद से भारत और कजाकिस्तान यूरेनियम आपूर्ति समझौते के लिए बातचीत कर रहे थे।
- हाल के महीनों में इस बातचीत में तेजी आई, जिसका नतीजा अब इस करार के रूप में सामने आया है।
साल दर साल भारत से ये हुए थे समझौते
- जनवरी 2009 में, कजाटोमप्रोम ने भारत के परमाणु ऊर्जा निगम (NPCIL) के साथ भारत को 2,100 टन यूरेनियम की आपूर्ति करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
- जुलाई 2015 में इसने भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग के साथ 2015-19 के दौरान 5,000 टन यूरेनियम की आपूर्ति करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
कजाकिस्तान की सरकारी कंपनी है कजाटोमप्रोम
- कजाटोमप्रोम यूरेनियम खनन, दुर्लभ धातुओं के प्रसंस्करण और बेरिलियम और टैंटलम उत्पादों के उत्पादन और बिक्री में लगी हुई है और कंपनी के सभी उत्पाद निर्यात किए जाते हैं।
- कंपनी सरकार द्वारा नियंत्रित है, जिसमें समरुककजीना राज्य कोष की 62.99% हिस्सेदारी, कजाख वित्त मंत्रालय की 12.01% हिस्सेदारी और 25% हिस्सेदारी स्वतंत्र रूप से उपलब्ध है।
भारत कहां-कहां से मंगाता है यूरेनियम
- वर्तमान में भारत कई देशों जैसे रूस, कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान, फ्रांस और कनाडा से यूरेनियम ईंधन का आयात करता है।
- 2012 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ भी करार किया था, जब ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने भारत को यूरेनियम बेचने का फैसला किया था। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया बाद में अपने निर्णय से पीछे हट गया था।
भारत में इतने हैं न्यूक्लियर रिएक्टर
- भारत में 6,780 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाले 22 न्यूक्लियर रिएक्टर हैं। इनमें से आठ रिएक्टर स्वदेशी यूरेनियम से संचालित होते हैं।
- बाकी के 14 रिएक्टर इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की सुरक्षा निगरानी में हैं और आयातित यूरेनियम का उपयोग करने के लिए पात्र हैं।













