ट्रंप भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर आशावादी
स्विट्जरलैंड के दावोस में व्यापार वार्ता की प्रगति के बारे में पूछे जाने पर भारतीय मीडिया से ट्रंप ने कहा-मैं आपके प्रधानमंत्री का बहुत सम्मान करता हूं। वे एक शानदार व्यक्ति और मेरे दोस्त हैं, और हम एक अच्छा समझौता करेंगे। प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर पहली बार प्रधानमंत्री मोदी की फरवरी 2025 में वॉशिंगटन यात्रा के दौरान चर्चा हुई थी। इस प्रस्ताव का लक्ष्य दोनों देशों के बीच व्यापार को वर्तमान लगभग 191 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर 2030 तक 500 अरब अमेरिकी डॉलर करना है, जो दोगुने से भी अधिक है।
भारत-अमेरिका व्यापार संबंध बेहद तनावपूर्ण
अमेरिका वर्तमान में कई भारतीय निर्यातों पर 50% तक का शुल्क लगाता है, जिसमें रूस से तेल खरीद के साथ-साथ भारत के उससे संबंध और ब्रिक्स संघ में भारत की भागीदारी से जुड़े उपाय भी शामिल हैं। भारत ने इसके जवाब में अमेरिका से आयातित कृषि उत्पादों पर चुनिंदा जवाबी शुल्क लगाए हैं। हाल ही में अमेरिकी दालों पर भारत के टैरिफ को कम करने को लेकर दो अमेरिकी सीनेटरों ने ट्रंप को पत्र भी लिखा था।
ट्रेड डील को संभव बनाने में लगे हैं दोनों पक्ष
अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% शुल्क के बावजूद, भारत का अमेरिका को निर्यात स्थिर बना हुआ है। दिसंबर में, माल निर्यात 6.89 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के 7.01 अरब डॉलर और नवंबर के 6.98 अरब डॉलर से थोड़ा ही कम है। हाल ही में भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि बातचीत कभी रुकी नहीं है और दोनों पक्ष इसमें लगे हुए हैं। उन्होंने कहा था कि दिसंबर के आखिरी सप्ताह में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ लंबित मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एक वर्चुअल बैठक की। दिसंबर में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने नई दिल्ली का दौरा किया। भारत में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी 14 जनवरी को अपना कामकाज संभालने के बाद ट्रेड डील को लेकर उम्मीद जताई थी। वहीं, 13 जनवरी को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु सहयोग, रक्षा और ऊर्जा के मुद्दों पर बात की थी।
अमेरिका ने कहा-मोदी ने फोन नहीं किया
ट्रंप अक्सर पीएम मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताते रहे। और फिर कड़े टैरिफ लगाते रहे। वह 500 फीसदी टैरिफ लगाने की भी धमकी दे चुके हैं। पीएम मोदी भी बीते साल भर से ट्रंप के इस झांसे में नहीं आए। यहां तक कि खुद अमेरिका ने भी यह बात मानी। हाल ही में अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने सुझाव दिया कि व्यापार समझौता इसलिए रुका क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने तीन सप्ताह के भीतर ट्रंप को फोन नहीं किया। विदेश मंत्रालय ने इस दावे को गलत बताया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा-भारत और अमेरिका पिछले साल 13 फरवरी से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत करने के लिए प्रतिबद्ध थे… कई मौकों पर हम समझौते के बेहद करीब पहुंचे… हम दो पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते में रुचि रखते हैं और इसे जल्द से जल्द पूरा करने की उम्मीद करते हैं।
टैरिफ के बाद भी भारत भेज रहा माल
अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बावजूद अमेरिका को होने वाला निर्यात स्थिर बना हुआ है। दिसंबर में, भारत का अमेरिका को होने वाला माल निर्यात 6.89 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल दिसंबर में यह 7.01 अरब डॉलर और नवंबर में 6.98 अरब डॉलर था।
अमेरिका-भारत ट्रेड डील में बड़ी अड़चन ये चीजें
अमेरिकी बाजार में जिन उत्पादों पर दबाव है, वे हैं कपड़ा और आभूषण, चमड़ा और समुद्री उत्पाद, जहां निर्यातक ग्राहकों को बनाए रखने के लिए लाभ में कटौती कर रहे हैं। इन श्रेणियों के कई निर्यातकों का कहना है कि टैरिफ कम करने वाले व्यापार समझौते के अभाव में वे इस रास्ते पर लंबे समय तक नहीं चल पाएंगे। साथ ही व्यापार वार्ता में बड़ी अड़चन अमेरिका के डेयरी प्रोडॅक्ट्स और एग्रीकल्चर प्रोडॅक्ट्स भी हैं, जिन पर भारत अमेरिका के आगे झुकने को तैयार नहीं है। दरअसल, भारत अपने किसानों और दूध उत्पादकों के हितों से कोई समझौता नहीं करना चाहता है।














