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  • US-INDIA TRADE DEAL LATEST NEWS: घमंडी अमेरिका ने मान ली भारत की ताकत, चीन से मुकाबले के लिए झुका

    नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच 13 जनवरी को फिर से ट्रेड डील को लेकर बात शुरू हो सकती है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को नई दिल्ली में पदभार ग्रहण करते हुए ये संकेत दिए। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध सच्ची दोस्ती पर आधारित हैं और उन्होंने दोनों देशों के


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    By Azad Hind Desk जनवरी 12, 2026
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    नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच 13 जनवरी को फिर से ट्रेड डील को लेकर बात शुरू हो सकती है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोमवार को नई दिल्ली में पदभार ग्रहण करते हुए ये संकेत दिए। उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध सच्ची दोस्ती पर आधारित हैं और उन्होंने दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता जारी रखने का संकेत दिया। गोर ने कहा-सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन मतभेदों को सुलझा लेते हैं। उन्होंने चल रही व्यापार वार्ता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच विश्वास पर निर्मित व्यापक और मजबूत साझेदारी का हिस्सा बताया। भारत को 500 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी देने वाले घमंडी ट्रंप ने आखिरकार भारत की ताकत का लोहा मान लिया है। तभी तो अमेरिका की अगुवाई वाले पैक्स सिलिका समूह में अगले महीने शामिल होने के लिए ट्रंप प्रशासन न्योता भेजने वाला है।

    भारत को पैक्स सिलिका में शामिल करेगा अमेरिका

    अमेरिकी राजदूत गोर ने पुष्टि की कि भारत और अमेरिका व्यापार मुद्दों पर ‘सक्रिय रूप से बातचीत’ जारी रखे हुए हैं और वार्ता का अगला दौर 13 जनवरी को होने की उम्मीद है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टैरिफ और बाजार पहुंच पर मतभेदों के बावजूद दोनों पक्ष नियमित संपर्क में हैं। एक महत्वपूर्ण घोषणा में गोर ने कहा कि भारत को अगले महीने अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्ससिलिका समूह में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। यह कदम वैश्विक प्रौद्योगिकी और इनोवेशन इकोसिस्टम में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।

    क्या है पैक्स सिलिका समूह

    U.S. Department of state के अनुसार, पैक्स सिलिका, अमेरिकी विदेश विभाग की आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी(AI) और सप्लाई-चेन सुरक्षा पर आधारित प्रमुख पहल है, जो सहयोगी देशों और विश्वसनीय साझेदारों के बीच आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक नई सहमति को बढ़ावा देती है। पैक्स एक ऐतिहासिक शब्द है जो शांति, स्थिरता और समृद्धि को दर्शाता है। यह आधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता और कंप्यूटिंग की नींव पर लागू होता है। इसकी रणनीतिक अवधारणा यह है कि यह सुरक्षित, लचीले और नवाचार-संचालित प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाली पहल है। इसमें महत्वपूर्ण दुर्लभ खनिजों, ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, एआई अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।

    कंप्यूटर और उसे एनर्जी देने वाले मिनरल्स पर नजर

    U.S. Department of state की वेबसाइट पर छपे एक लेख में कहा गया है कि यदि 20वीं सदी तेल और इस्पात पर टिकी थी, तो 21वीं सदी कंप्यूटर और उसे ऊर्जा प्रदान करने वाले खनिजों पर टिकी है। यह ऐतिहासिक घोषणा एक नई आर्थिक सुरक्षा सहमति का स्वागत करती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि सहयोगी देश भविष्य के एआई पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करें। इस तंत्र का दायरा ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों से लेकर उच्च स्तरीय विनिर्माण और मॉडलिंग तक होगा।

    पैक्स सिलिका के कौन-कौन से मेंबर हैं

    पैक्स सिलिका समूह अमेरिका के नेतृत्व वाला समूह है, जिसके सदस्य जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर हैं। इसे 2025 के आखिर और 2026 की शुरुआत में बनाया गया है।

    पैक्स सिलिका समूह क्यों बनाया गया

    पैक्स सिलिका समूह सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मिनरल्स और एआई के लिए सुरक्षित, लचीली और नवाचार-संचालित आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण करना, जिसका उद्देश्य चीन पर निर्भरता कम करना और विश्वसनीय प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है। यह गठबंधन उन्नत विनिर्माण, चिप डिजाइन और खनिज स्रोतों के समन्वय के माध्यम से भविष्य की तकनीक को सुरक्षित करने पर केंद्रित है।

    पैक्स सिलिका में भारत को क्यों चाहता है अमेरिका

    अपने नवजात सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के कारण भारत को पैक्स सिलिका से बाहर रखा गया था। हालांकि, अब अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि भारत को जल्द ही पूर्ण सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जाएगा, क्योंकि इसकी महत्वपूर्ण चिप डिजाइन क्षमता की अहमियत काफी ज्यादा है। इस समूह में भारत को शामिल करने के पीछे एक और प्रमुख कारण भू-राजनीतिक और आर्थिक गुट है, जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी पर केंद्रित निर्भरता का मुकाबला करना और अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों में विश्वसनीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

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