ईरान के पास अमेरिकी सैन्य उपस्थिति
ट्रंप की लगातार चेतावनियों के बावजूद ईरान के पास अमेरिकी सैन्य उपस्थिति काफी कम है। हालांकि, अमेरिका ने हाल में ही ईरान के पास सैन्य शक्ति को बढ़ाने का ऐलान किया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों को शक है कि अमेरिका शायद ही ईरान के पास जून 2025 जैसी सैन्य तैनाती कर पाए, क्योंकि वह कई मोर्चों पर खतरे का सामना कर रहा है। अमेरिका इन दिनों ऑपरेशन सदर्न स्पीयर के तहत कैरिबियन में बड़े पैमाने पर सैन्य तैनाती की है। इसके अलावा अदन की खाड़ी, दक्षिणी चीन सागर और हिंद महासागर में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़ी है।
ईरान के पास अमेरिकी सेना के 19 ठिकानें
अमेरिका ने ईरान से जारी तनाव को देखते हुए बरसों से मध्य पूर्व में 19 सैन्य ठिकानें विकसित किए हैं। इनमें बहरीन, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में आठ स्थायी बेस शामिल हैं। इन सब में सबसे महत्वपूर्ण कतर में अल उदीद एयर बेस है, जो इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा मिलिट्री ठिकाना है, जहां लगभग 10,000 सैनिक तैनात हैं।
टॉमहॉक मिसाइल से हमला
अमेरिका ने 2025 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर B-2 बॉम्बर से हमला किया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अपने सैनिकों को भेजने के बजाए दूर से हमले का विकल्प चुनेगा। इनमें एक विकल्प टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से हमला है। इस मिसाइल को अमेरिकी नौसेना की पनडुब्बियों और युद्धपोतों से लॉन्च किया जा सकता है जो ईरानी तटों से बहुत दूर तैनात हैं। इससे अमेरिकी नौसैनिकों को खतरा भी कम होगा।
JASSM मिसाइल से हमला
दूसरा विकल्प है, जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल (JASSM) से हमला। इस मिसाइल में 1,000 पाउंड का कवचभेदी वॉरहेड होता है। इसकी रेंज 620 मील (1,000 किलोमीटर) है। JASSM को कई तरह के लड़ाकू विमानों से फायर किया जा सकता है, जिसमें F-15, F-16, और F-35 फाइटर जेट और B-1, B-2, और B-52 बॉम्बर शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिकी नौसेना के F/A-18 जेट से भी इसे दागा जा सकता है।
ड्रोन हमला
विश्लेषकों का यह भी मानना है कि अमेरिका ईरान पर ड्रोन से भी हमले का विकल्प आजमा सकता है। ये अमेरिकी लड़ाकू विमानों के पायलटों के लिए जोखिम को कम कर सकते हैं। साथ में अमेरिका के लिए निगरानी का काम भी कर सकते हैं। वर्तमान में ईरान के पास अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियरों की कमी के कारण दूर से ही हमले की आशंका ज्यादा है।
साइबर हमला
अमेरिका ईरान के खिलाफ साइबर हमले का विकल्प भी आजमा सकता है। इतना ही नहीं, अमेरिका ईरानी प्रदर्शनकारियों के लिए इंटरनेट बहाल कर सकता है, जिससे ईरान को बड़ा झटका लगेगा। साइबर हमला ईरान के एयर डिफेंस नेटवर्क और ड्रोन कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम को भी निशाना बना सकता है।













