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  • Vastu Tips And Upay : भूखण्ड की प्राप्ति के लिए इस प्रकार करें मंत्र जाप तथा इन नियमों की अनदेखी न करें

    वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार एवं वर्षों से वास्तु शास्त्र का कार्य करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार निष्कर्ष इस प्रकार है। पूर्व दिशा अथवा उत्तर दिशा में ऊंची भूमि पुत्र बाधा और धन में कमी लाने वाली होती है। आग्नेय कोण, नैऋत्य कोण अथवा वायव्य कोण में ऊंची भूमि धनदायक मानी गई है। पश्चिम


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    By Azad Hind Desk जनवरी 21, 2026
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    वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार एवं वर्षों से वास्तु शास्त्र का कार्य करने वाले विशेषज्ञों के अनुसार निष्कर्ष इस प्रकार है।

    • पूर्व दिशा अथवा उत्तर दिशा में ऊंची भूमि पुत्र बाधा और धन में कमी लाने वाली होती है।
    • आग्नेय कोण, नैऋत्य कोण अथवा वायव्य कोण में ऊंची भूमि धनदायक मानी गई है।
    • पश्चिम दिशा में ऊंची भूमि पुत्रपद तथा धन-धान्य की वृद्धि करने वाली होती है।
    • दक्षिण दिशा में ऊंची भूमि सब कामनाओं को पूर्ण करने वाली तथा निरोग बनाने वाली है।
    • ईशान कोण में ऊंची भूमि महाक्लेशकारक है।

    नारद पुराण में आया है कि पूर्व दिशा, उत्तर दिशा और ईशान कोण में नीची भूमि सभी मनुष्यों के लिए अत्यन्त वृद्धिकारक है। अन्य दिशाओं में नीची भूमि सबके लिए हानिकारक होती है।

    • पूर्व दिशा में नीची भूमि पुत्रदायक तथा धन की वृद्धि करने वाली है।
    • आग्नेय कोण में नीची भूमि मृत्यु और शोक देने वाली, धन का नाश करने और अग्निभय देने वाली होती है।
    • दक्षिण दिशा में नीची भूमि मृत्युदायक, क्षयकारक और अनेक दोष करने वाली होती है।
    • नैऋत्य कोण में नीची भूमि महान भयदायक, रोगदायक, धन की हानि और चोरभय करने वाली होती है।
    • पश्चिम दिशा में नीची भूमि धन-धान्य व कीर्तिनाशक, शोकदायक, पुत्रक्षय तथा कलहकारक है।
    • वायव्य कोण में नीची भूमि परदेशवास कराने वाली, उद्वेगकारक, मृत्युदायक, कलहकारक, रोगदायक तथा धान्यनाशक है।
    • उत्तर दिशा में नीची भूमि धन-धान्यप्रद और वंशवृद्धि करने वाली अर्थात् पुत्रदायक है।
    • ईशान कोण में नीची भूमि विद्या देने वाली, धनदायक, रत्नसंचय करने वाली और सुखदायक है।
    • भूखण्ड के मध्य की जगह, जिसे ब्रह्म स्थान कहते हैं, उस जगह नीची भूमि रोगप्रद तथा सर्वनाश करने वाली होती है।

    भूमि अथवा मकान न मिल रहा हो तो- किसी व्यक्ति को प्रयत्न करने पर भी निवास के लिए भूमि अथवा मकान न मिल रहा हो तो उसे भगवान वराह की उपासना करनी चाहिए। भगवान वराह की उपासना करने से, उनकी स्तुति-प्रार्थना करने से अवश्य ही निवास के योग्य भूमि या मकान मिल जाता है। स्कन्द पुराण के वैष्णव खण्ड में आया है कि भूमि प्राप्त करने के इच्छुक मनुष्य को सदा ही, ‘ओम् नमः श्रीवराहाय धरण्युद्धारणाय स्वाहा’ मंत्र का जाप करना चाहिए।

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